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किसान नेता वीएन सिंह ने कहा- हर सरकार झुकेगी अगर किसान हों एकजुट

Wed, 04 Oct 2017 09:35 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर/आजमगढ़/चंदौली
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सभा को संबोधित करते वीएन सिंह - फोटो : अमर उजाला
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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से चंपारण जिले से निकाली गई ‘किसान मुक्ति यात्रा’ बुधवार को पूर्वांचल के गाजीपुर, चंदौली और आजमगढ़ जिले में पहुंची।
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संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक सरदार वीएन सिंह ने कहा कि देश के किसान एकजुट हो गए तो हर सरकार को उनके आगे झुकना होगा। भाजपा और प्रधानमंत्री के खिलाफ हमलावर रहे किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि देश और प्रदेश के किसानों ने नरेंद्र मोदी के वादों पर भरोसा कर सरकार बनवाई। लेकिन इसके बदले में किसानों को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

कुछ मिला तो झूठे वादे और जुमले। किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम देने का वादा भी झूठा साबित हुआ है।  उन्होंने कहा पूरे देश के किसानों को एकजुट करने के लिए वे इस यात्रा पर निकले हैं।
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देश के 180 किसान संगठन केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए समन्वय समिति से जुड़ चुके हैं। केंद्र पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्जमाफी और लागत मूल्य देने के नाम पर मोदी सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी वादे में कहा था कि सरकार बनने के बाद स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करेंगे। लेकिन जब सरकार बनी तब न्यायालय में हलफनामा दे दिया कि वह रिपोर्ट को लागू नहीं कर सकते हैं।

यह किसानों के साथ छल है। किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि यदि अकेले लड़ोगे तो सरकार कुचल देगी।
 
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'किसानों पर नहीं, देश पर किसानों का कर्ज'

आजमगढ़ में योगेंद्र यादव - फोटो : अमर उजाला
आजमगढ़ में योगेंद्र यादव ने कहा कि आज का किसान भूखमरी का शिकार है। आत्महत्या करने को मजबूर है। जिसके क्ई कारण हैं जैसे आर्थिक, पर्यावरण और उचित दाम। भाजपा के लोग बात करते हैं पर काम नहीं करते।

दिल्ली के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने वायदे से हट गए, इसके चलते हमको अलग कदम उठाना पड़ा। भाजपा के विकल्प के सवाल पर उन्होंने कहा कि लालू, मुलायम, शरद, मायावती का मामला भानुमति का कुनबा है।

अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि किसानों पर नहीं, देश पर किसानों का कर्ज है, इसलिए किसानों को संपूर्ण कर्ज से मुक्ति देनी होगी। उनकी उपज के लागत मूल्य में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर मूल्य तय करना होगा। उन्होंने 20 नवंबर को दिल्ली में आयोजित किसान संसद में भाग लेकर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।


महासभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि देश में अफीम उत्पादन की एकमात्र फैक्ट्री गाजीपुर में है, लेकिन पोस्ता की खेती का लाइसेंस यहां के किसानों को देने के बजाय राजस्थान में दिया जा रहा है।

केंद्र और प्रदेश सरकार के पशु वध अधिनियम ने किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। देश में पूंजीपति और कारपोरेट घरानों का अरबों रुपये के कर्ज केंद्र ने माफ कर दिए हैं, लेकिन किसानों की कर्जमाफी का बोझ राज्य सरकारों पर डालने से उसका किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है।   

 
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