वाराणसी निवासी कक्षा छह का छात्र अक्षत।
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प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती है। वाराणसी के कैथी गांव के 11 वर्षीय अक्षत की प्रतिभा देखकर हर कोई दंग हैं। उसकी मेधा देखकर लोग उसे काशी का कौटिल्य कहने लगे हैं। अक्षत को श्रीमद्भागवत गीता, नौ उपनिषद और पांच दर्शन पूरी तरह से कंठस्थ हैं। अक्षत अब वेद तथा अष्टाध्यायी के सूत्रों को याद करने में जुटा हुआ है।
जिस प्रकार गणन के अद्भुत ज्ञान के लिए गूगल ब्वाय कौटिल्य की ख्याति है उसी प्रकार जल्द ही काशी के अक्षत की भी वेद अध्ययन के क्षेत्र में विशेष पहचान होगी। अक्षत वर्तमान में योगगुरु स्वामी रामदेव द्वारा संचालित पतंजलि गुरुकुलम हरिद्वार में कक्षा छह का छात्र है। मार्च 2019 में उसका प्रवेश हुआ था। मात्र 14 महीने के अध्ययन में ही अक्षत ने अनेक ग्रंथों को कंठस्थ कर लिया।
उसकी यह प्रतिभा देखकर स्वामी रामदेव ने भी कहा था कि मात्र 19 घंटे में अक्षत ने पांच दर्शन कंठस्थ किए हैं जो एक विश्व कीर्तिमान है। अक्षता के पिता अरुण पांडेय गांव में ही जनसुविधा केंद्र चलाते हैं। माता साधना पांडेय गृहणी हैं। अक्षत का बड़ा भाई देव मिहिर पांडेय दसवीं कक्षा का छात्र है।
अक्षत के दादा चिंता हरण पांडेय सेना में थे जो अब अवकाश प्राप्त हैं। अक्षत के पिता ने बताया कि बचपन से ही वह किसी भी पाठ को एक बार पढ़ लेता है तो उसे कंठस्थ हो जाता है। उसकी प्रतिभा को देखते हुए घर वालों ने उसे अपने से दूर रखकर गुरुकुलम में शिक्षा के लिए भेजने का कठिन निर्णय लिया।