वरिष्ठ कथक कलाकार संगीता सिन्हा और उर्वशी श्रीवास्तव।
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वरिष्ठ कथक कलाकार संगीता सिन्हा ने अपने गुरु स्वर्गीय पंडित बिरजू महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरु ने हमें केवल नृत्य नहीं सिखाया, बल्कि भारतीय संस्कृति, विनम्रता और अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। आज उनकी शिक्षाएं हजारों कलाकारों के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं।
इस अवसर पर उनकी पुत्री एवं शिष्या उर्वशी श्रीवास्तव ने मां संगीता सिन्हा के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। उर्वशी ने कहा कि मेरे लिए मां ही मेरी पहली गुरु हैं। उनसे मिली शिक्षा और संस्कार ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। गुरु का आशीर्वाद हर कलाकार को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देता है।
कथक कलाकार आशीष सिंह उर्फ नृत्य मंजरी दास और कथक नृत्यांगना नम्रता श्रीमाली।
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युवा कथक कलाकार आशीष सिंह उर्फ नृत्य मंजरी दास के शिष्यों ने भी गुरु पूजा कर उनका सम्मान किया। आशीष सिंह ने कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि साधना है। गुरु से मिली परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। जब शिष्य समर्पण के साथ सीखते हैं तो गुरु का जीवन सफल हो जाता है।
युवा कथक नृत्यांगना नम्रता श्रीमाली ने कहा कि गुरु के बिना जीवन अंधकारमय हो जाता है। गुरु ही ज्ञान का प्रकाश हैं, जो हमें सही दिशा दिखाते हैं। कला में सफलता तभी मिलती है, जब गुरु के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास बना रहे।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित इन कार्यक्रमों में कलाकारों और शिष्यों ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों की अनूठी छटा देखने को मिली। कलाकारों ने कहा कि बदलते समय में भी कथक जैसी शास्त्रीय विधाओं की आत्मा गुरु-शिष्य परंपरा में ही बसती है और यही परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय संस्कृति की विरासत को सुरक्षित पहुंचाएगी।