हरहुआ के काजीसराय क्षेत्र की मुस्लिम बस्ती में मांग रहे थे भीख
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वाराणसी के बड़ागांव थाना अंतर्गत एक बाजार में एक ऑटो से बुधवार को 11 बजे के लगभग कश्मीर की पांच युवतियां और एक युवक उतरा। सभी ने मुस्लिम बस्ती का पता पूछा और उधर ही निकल लिए। ऑटो चालक बाजार स्थित एक सैलून पर आया और जिक्र किया कि कश्मीर के युवक और युवतियां मुस्लिम बस्ती का पता पूछते हुए गए हैं।
इसी दौरान सैलून में सीआरपीएफ के दो जवान बाल कटवा रहे थे और उन्होंने चालक की बात सुनी तो पहड़िया स्थित सीआरपीएफ की 95 बटालियन के हेडक्वार्टर फोन किया। इसके बाद दोनों जवान युवक-युवतियों को खोजते हुए मुस्लिम बस्ती पहुंचे जहां सभी भीख मांग रहे थे।
मैजिक से सभी को हरहुआ पुलिस चौकी ले जाया गया। थोड़ी ही देर में मामला सार्वजनिक हुआ तो आईबी और एलआईयू के अधिकारी भी हरहुआ पुलिस चौकी पहुंचे। लगभग चार घंटे तक हरहुआ पुलिस चौकी में सभी से पूछताछ की गई।
सभी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी ठंड शुरू होते ही नवंबर में कश्मीर के बारामूला और आसपास के जिलों से आकर 35 परिवार किला कोहना स्थित पैराडाइज मैदान में टेंट लगाकर ठहरे हुए हैं।
युवक-युवतियों ने बताया कि बारामूला और आसपास के जिलों में ठंड बढ़ते ही वहां के लोग प्रत्येक वर्ष बनारस सहित अन्य शहरों में आकर कंबल और ड्राई फ्रूट्स बेचते हैं।
चुनिंदा बस्तियों में ही क्यों जाते हैं
हरहुआ पुलिस चौकी में चार घंटे पूछताछ
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सामान खत्म होने पर भीख मांग कर जीवन यापन करते हैं। फरवरी के आखिरी में सभी वापस अपने घर लौट जाते हैं। यहां ठहरने की जानकारी स्थानीय थाने की पुलिस को भी दी जाती है। सभी के नाम-पता संबंधी विवरण, आधार की फोटोकॉपी लेने, आईबी व एलआईयू के अधिकारियों से बातचीत के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
इस संबंध में बड़ागांव थानाध्यक्ष ने बताया कि पैराडाइज मैदान में ठहरने के कारण आदमपुर पुलिस के पास सभी का विवरण उपलब्ध है। एलआईयू ने भी अपने स्तर से वेरिफिकेशन कर रखा है। सभी का परिचय पत्र व आधार कार्ड देखकर, उनकी फोटोकॉपी लेकर और पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया गया है।
सीआरपीएफ के जवानों का कहना था कि पैराडाइज मैदान में ठहरे लोगों की गतिविधियों पर उनकी नजर है। ये सभी बेहद संवेदनशील क्षेत्र के रहने वाले हैं। ये सभी शहर से दूर चुनिंदा बस्तियों में ही क्यों जाते हैं, इस पर जिला पुलिस को गंभीरता के साथ नजर रखनी चाहिए।