जगन्नाथ मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने से पहले नापी करते इंजीनर संवाद
पुरी के जगन्नाथ धाम की तर्ज पर काशी में जगन्नाथ मंदिर का पुनर्विकास किया जाएगा। मुख्य शिखर की ऊंचाई 151 फीट प्रस्तावित है। इसके तहत करीब एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में जगन्नाथ कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके लिए बुधवार को इंजीनियरों और ग्राफिक्स डिजाइनरों की टीम ने मंदिर पहुंचकर नाप-जोख की। वहीं, राजस्थान से आए शिल्पकारों की टीम ने भी मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। जगन्नाथ मंदिर का स्वरूप इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि मां गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु नदी तट से ही मंदिर के मुख्य शिखर के दर्शन कर सकेंगे।
परिसर में पारंपरिक ज्ञान और वेदाध्ययन की व्यवस्था भी होगी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क महाप्रसाद और भोजन की व्यवस्था रहेगी। साथ ही अत्यंत कम शुल्क पर ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। निरीक्षण करने वाली टीम में हेड इंजीनियर रजनीकांत उपाध्याय, आर्किटेक्ट अमित कुमार गुप्ता, आर्किटेक्ट जयेश तिवारी, ग्राफिक्स डिजाइनर संजेश मिश्रा, अभिषेक पांडेय और मानसिंह पटेल शामिल रहे। टीम ने निर्माण कार्य की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार की। सबसे पहले परिसर में स्थित गरुड़ मंदिर की नाप-जोख की गई।
ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर की मूल संरचना और प्राचीन विग्रहों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए निर्माण कार्य कराया जाएगा। निर्माण कार्य पूरा होने में करीब 41 महीने लगने का अनुमान है। यदि कार्य तय समय पर पूरा हुआ तो दिसंबर 2029 तक मंदिर नए स्वरूप में नजर आएगा।
पहले चरण में खर्च होंगे 30 करोड़ रुपये
पहले चरण में निर्माण पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जगन्नाथ मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला की नागर शैली में किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी राजस्थान के शिल्पकार गिरिराज सैनी और उनकी टीम को सौंपी गई है। उनकी टीम में कारीगर विष्णु योगी और अशोक योगी शामिल हैं। धौलपुर (राजस्थान) से लाए गए लाल, गुलाबी और सफेद पत्थरों से मंदिर की नक्काशी और निर्माण कार्य किया जाएगा। मंदिर में दो शिखर होंगे।