काशी के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिरों और चार धाम क्षेत्रों को नए साल में संवारा जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही पर्यटन के नजरिये से भी इन मंदिरों और क्षेत्रों को विकसित करने की तैयारी है।
नगर निगम ने इसके लिए बीते साल प्रस्ताव शहरी विकास मंत्रालय को भेजा था। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से जल्द ही इसकी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
जग विख्यात द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक काशी (विश्वनाथ मंदिर) में है, साथ ही सभी ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप प्रतिनिधि विग्रह और मंदिर भी हैं। इसके अलावा सभी चार धामों के प्रतिरूप मंदिर हैं। पीएम के संसदीय क्षेत्र काशी की धार्मिक, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और कायाकल्प पर केंद्र सरकार का विशेष जोर है।
महापौर रामगोपाल मोहले के निर्देश पर नगर निगम के अधिकारियों ने काशी के हेरिटेज की सूची बीते साल के जुलाई माह में बनाई थी। इनके संरक्षण और विकास का प्रस्ताव तैयार कर शहरी विकास मंत्रालय को भेजा गया था। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से शहरी विकास मंत्रालय इसकी कार्ययोजना को अंतिम रूप देने वाला है।
इसके तहत ज्योतिर्लिंग मंदिर संवारे जाएंगे। साथ ही, चार धाम क्षेत्रों में यातायात, सड़क, सफाई के अलावा दर्शनार्थियों और पर्यटकों की सहूलियत के लिए अन्य सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। दरअसल, यहां के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिरों में बाबा विश्वनाथ और महामृत्युंजय मंदिर को छोड़ बाकी की हालत देखरेख के अभाव में खस्ता हो गई है।
बाहर से आने वाले श्रद्धालु जानकारी के अभाव में इन तीर्थों तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में नगर निगम ने यह भी तय किया है कि इन तीर्थों के बारे में कैंट रेलवे स्टेशन और बाबतपुर एयरपोर्ट के बाहर विस्तृत जानकारी वाले बोर्ड लगाए जाएंगे।