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द्वितीय सहस्त्राब्दी से ही व्यापारिक केंद्र था काशी 

Sat, 28 Jan 2017 09:08 PM IST
टीम डिजिटल, वाराणसी
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Makar Sankranti in varanasi - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि मध्य गंगा घाटी और काशी क्षेत्र में नगरीकरण की प्रक्रिया द्वितीय सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व में हुई थी। उसी दौरान लोहे का इस्तेमाल शुरू हुआ था।
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उस वक्त से ही वाराणसी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था, जहां से उत्तरापथ और दक्षिणपथ के मार्ग जाते थे। बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग बीएचयू द्वारा आयोजित ‘वाराणसी : संस्कृति एवं विरासत’ में बतौर मुख्य अतिथि ये बातें कहीं।

उन्होंने वाराणसी क्षेत्र के महत्वपूर्ण पुरास्थल मलहर, राजा नल का टीला, टोकवा, प्रह्लादपुर के बारे में भी बताया। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा काशी और उसकी धरोहर, भारतीय संस्कृति का विलक्षण उदाहरण है।
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कला संकाय प्रमुख प्रो. कुमार पंकज ने साहित्य, कला और भारतीय सिनेमा में वर्णित काशी के अध्ययन पर जोर दिया। प्रो. विभा त्रिपाठी ने काशी के पुरातत्व के बारे में बताया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद प्रो. वीडी मिश्र ने पाषाण काल से लेकर दसवीं शताब्दी तक के इतिहास पर चर्चा की।

हेड प्रो. पुष्पलता सिंह ने संगोष्ठी के उद्देश्यों के बारे में बताया। संचालन प्रो. डीके ओझा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ओएन सिंह ने किया। प्रो. राणा पीबी सिंह, डॉ. अमिताभ भट्टाचार्य, डॉ. राजेश्वर आचार्य, प्रो. चंद्रमौलि, प्रो. ओपी श्रीवास्तव, प्रो. शारदा वेलंकर ने व्याख्यान दिया।
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