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काशी विश्वनाथ मंदिर में भी होंगे VIP दर्शन, इतने रुपए देकर श्रद्धालु ले सकेंगे लाभ

Mon, 18 Jun 2018 10:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ मंदिर
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देश के प्रमुख मंदिरों की तर्ज पर अब श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी वीआईपी दर्शन होंगे। सावन मेले से पहले इस नई व्यवस्था पर मुहर लग जाएगी। वीआईपी टिकट के लिए मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही हेल्प डेस्क और टिकट काउंटर बनाया जाएगा।
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वीआईपी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं 500 रुपये देने होंगे। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने शुल्क की व्यवस्था शुरू किए जाने की पुष्टि की है। मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर परिसर के सुंदरीकरण के लिए कई और कदम उठाने जा रहा है।

छत्ता द्वार, ढुंढिराज गणेश और सरस्वती फाटक प्रवेश द्वार के सुंदरीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा कराने की तैयारी है। इसके बाद सरस्वती फाटक और ज्ञानवापी परिक्षेत्र में फव्वारा और भगवान शिव की गंगधार स्वरूप की प्रतिमा लगाई जाएगी।
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तिरुपति बालाजी मंदिर, शिरडी साईं बाबा, मां वैष्णो देवी, महाकालेश्वर महादेव, ओंकारेश्वर महादेव, त्र्यंबकेश्वर महादेव और सलासार वाले हनुमान जी के मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क लिए जाने की व्यवस्था पहले से ही है।
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किराएदारों को जारी नोटिस को हाईकोर्ट ने ठहराया अवैध

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श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर मामले में हाईकोर्ट ने मंदिर परिक्षेत्र में खरीदे गए भवनों में रहने वाले किराएदारों को मंदिर प्रशासन की ओर से जारी बेदखली के नोटिस को अवैध ठहराया है। साथ ही, नीलकंठ क्षेत्र के दो और भवनों पर सुनवाई करते हुए यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट के जज सुनीता अग्रवाल और अजीत कुमार ने नीलकंठ क्षेत्र में मकान नंबर सीके 33/20 और 33/16 में रहने वाले शरद कुमार मेहरा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से मकान खाली करने के लिए जारी नोटिस को अवैध करार दिया है।

सरकारी वकील ने  तर्क दिया कि पब्लिक की सुविधा के लिए काशी विश्वनाथ पाथवे का निर्माण किया जा रहा है। इसलिए बेदखल करने का आदेश दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप किस आधार पर इनको बेदखल कर रहे हैं। बेदखली की बात नोटिस चस्पा करके हो रही है।

ऐसा कोई तरीका कानून में नहीं है कि आप मंदिर प्रशासन की तरफ से एक नोटिस देकर किसी को भी बेदखल कर सकें। इसके लिए आपको न्यायालयी प्रक्रिया अपनानी होगी।

इसके बाद कोर्ट ने विठ्ठल भवन पर पूर्व में जारी आदेश के अनुसार मंदिर प्रशासन को आदेश दिया कि वह इन मामलों में भी अगली सुनवाई तक यथास्थिति को बहाल रखे। 
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