वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन मां शृंगार गौरी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर रेड जोन परिसर के ज्ञानवापी प्रांगण में मंदिर स्थित होने के कारण वर्ष में एक बार ही श्रद्धालुओं को दर्शन का मौका मिलता है।
प्रतिबंधित क्षेत्र होने के कारण भक्त मां को नारियल और शृंगार पूजन का सामान नहीं चढ़ा सके। मंगला आरती के बाद कपाट खुलते ही दर्शनों का जो सिलसिला शुरू हुआ देर रात तक चलता रहा।
पूरा रेड जोन परिसर मां के जयकारे से गूंज उठा। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को श्रृंगार गौरी के दर्शन का सिलसिला आरंभ हुआ। मंदिर के महंत सूर्य लाल व्यास ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से माँ का मंदिर सामान्य दिनों में बंद रहता है केवल नवरात्र में ही मां के दर्शन होते हैं।
महंत ने बताया कि सर्वप्रथम मां का जलाभिषेक कर प्रतिमा में सिंदूर का लेपन किया गया। इसके उपरांत मां का मुखौटा लगाकर भव्य शृंगार किया गया। भोर में 4.30 बजे माँ की विराट आरती की गई और 5 बजे से श्रधालुओं के लिए कपाट खोल दिया गया।
कपाट खुलने के बाद माता का दर्शन निरंतर चलता रहा। हालांकि रेड जोन प्रतिबंधित क्षेत्र होने से आम श्रद्धालु मां को नारियल और शृंगार पूजन का सामान अर्पित नहीं कर सके। भाजपा नेताओं ने सर्वप्रथम मां का जलाभिषेक किया। पांच वैदिक ब्राह्मणों के साथ कार्यकर्ताओं ने जलाभिषेक के उपरांत मां का शृंगार किया।
इसके उपरांत मां की विधिवत पूजा आराधना की गई। मां दुर्गा के चौथे स्वरूप के रूप में स्थापित कूष्मांडा देवी के दर्शनों के लिए दुर्गाकुंड मंदिर में दर्शनों की कतार लगी रही।
भक्तों ने मां को माला-फूल, प्रसाद, नारियल और चुनरी अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुहागिन महिलाओं ने भी मां को शृंगार का सामान अर्पित कर अखंड सुहाग की कामना की।
नवरात्र के पांचवें दिन विशालाक्षी गौरी का दर्शन-पूजन होगा। कलह-क्लेश और रोग-शोक को तारने वाली मां विशालाक्षी का मंदिर मीरघाट पर स्थित है। मान्यता के अनुसार विशालाक्षी देवी के दर्शन-पूजन से भौतिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है एवं समस्त दुखों का निवारण होता है।