काशी विश्वनाथ मंदिर की स्वर्णिम आभा
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धनतेरस से लेकर अन्नकूट तक भव्य आयोजन में दर्शन के लिए आने वाले सभी दर्शनार्थियों को खजाना स्वरूप सिक्का और लावा दिया जाएगा। मान्यता है कि अन्नपूर्णा दरबार से आशीर्वाद स्वरूप मिले इस खजाने से घर परिवार में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती है।
देश-विदेश से आने वाले सभी दर्शनार्थियों के लिए मंदिर में दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए बैरिकेडिंग और प्रवेश निकास की व्यवस्था भी अलग से की गई है। पुलिस और मंदिर प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
आदि विश्वेश्वर को अन्न की भिक्षा देनी वाली मां जगदंबा स्वरुपिणी माता अन्नपूर्ण के स्वर्णिम स्वरूप के दर्शन रविवार से शुरू हो जाएंगे। भक्तों को प्रसाद स्वरूप चांदी के सिक्के बंटेंगे। 23 अक्तूबर से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला 26 तक अनवरत चलेगा। शनिवार सुबह बांसफाटक से गोदौलिया तक बैरिकेडिंग में भक्त कतारबद्ध होने लगे थे।
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के महंत शंकर पुरी ने नाश्ता, पानी और चाय का इंतजाम करवाया। सुबह, दोपहर और शाम को वालंटियर ने श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया। 23 अक्तूबर को चार बजे भोर में माता के मंदिर का कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा। भक्त परिसर में बनी अस्थायी सीढ़ी से होते हुए प्रथम तल पर विराजमान माता के दर्शन कर राम मंदिर से बाहर निकलेंगे।
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