पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पता था कि ये जड़ता बनारस की नहीं थी। हो भी नहीं सकती थी। इसमें थोड़ा बहुत राजनीति और थोड़ा निजी स्वार्थ था। बनारस पर आरोप लगाए जा रहे थे लेकिन काशी तो काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है। यहां महादेव की सरकार है। पीएम मोदी ने इस दौरान केन्द्र तथा राज्य सरकारों के काम के साथ ही साथ इतिहास की गर्त में समा चुके आतताइयों का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने कहा कि आतातायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए। औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की। लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है।
यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं। अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।
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दरअसल, काशी का इतिहास भारतीय संस्कृति के समृद्धि की जानकारी देने वाला इतिहास है। यह 11वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी के बीच भारतीय संस्कृति के प्रतीक चिह्नों के विध्वंस और पुनर्निर्माण के संघर्ष की कहानी है। मान्यता के अनुसार, खुद भगवान शिव के मां पार्वती के साथ पृथ्वी पर सर्वप्रथम यहीं प्रकट हुए थे।
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इसी कारण इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आदि यानी प्रथम शिवलिंग का महत्व दिया गया है। आदि शंकराचार्य, अहिल्याबाई होल्कर, संत रविदास, संत कबीर, भगवान बुद्ध के कृतित्व व व्यक्तित्व से प्रेरित काशी प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में कहे तो सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के जीवंत प्रमाण है। इसमें यदि सोमनाथ के विध्वंस और उसके पुनर्निर्माण के साथ काशी विश्वनाथ के विध्वंस और पुर्निर्माण की गाथा जोड़ दी जाए तो अपने आप पूरे देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संदेश चला जाता है ।