- काशी विश्वनाथ धाम के भवन हैं 150 साल पुराने
- मकानों के ध्वस्त किए जाने और भारी मशीनों के इस्तेमाल से हिल चुकी है मकानों की नींव
- एक-दूसरे से सटे होने के कारण दीवारें व छतें रुकी रहती हैं। ध्वस्तीकरण से आसपास के मकान जर्जर हो चुके हैं।
- जर्जर छज्जे के नीचे मजदूर सो रहे थे। मजदूरों को वहां सोने से रोका जाना चाहिए था।
- निर्माण स्थल पर बिना बैरिकेडिंग के हो रहा था काम
-प्रकाश का नहीं था समुचित इंतजाम
सुझाव
- निर्माण के दौरान सुरक्षा के सभी मानकों का रखा जाए ध्यान
- प्रकाश का समुचित इंतजाम किया जाए
- श्रमिकों के लिए निर्धारित स्थान पर ही विश्राम करने का सुझाव
काशी विश्वनाथ धाम परिक्षेत्र के आसपास बनारस के पुराने मोहल्ले बसे हुए हैं। यहां पर मकान भी काफी पुराने हैं। काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण कार्य के दौरान कार्यदायी एजेंसी की ओर से भारी-भरकम मशीनों का कई महीनों से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण पुराने मकानों की नींव हिल चुकी है। शासन की जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि कर दी है।
धाम के आसपास ललिता घाट, धर्मकूप, मीरघाट, नीलकंठ गली, सरस्वती फाटक, कालिका गली, ढुंढिराज और नंदू फरिया लेन में मशीनों की वजह से भवनों को काफी नुकसान पहुंचा है। कई मकान नींव से छत तक चिटक चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉरिडोर निर्माण के दौरान कार्यदायी एजेंसी की ओर से बड़ी-बड़ी मशीनों के इस्तेमाल से आसपास के दर्जनों मकानों की नींव हिल चुकी है।
दीवारों में दरार पड़ चुकी है। आंगन तक के फर्श फट गए हैं। क्षेत्र के अधिकतर मकान पुराने हैं। कुछ मकानों का तो लंबे समय से मेंटेनेंस ही नहीं हुआ है। कुछ इतनी संकरी गलियों में हैं कि नव निर्माण करना मुश्किल है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बाबत कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन सुनवाई नहीं होती है। कुछ लोगों ने मंदिर प्रशासन को अपना मकान देने के लिए अर्जी तैयार कर रखी है।