वाराणसी। काशी विश्वनाथ धाम में हर दिन कोई न कोई विवाद सामने आ रहा है। गंगा घाटों पर रहने वाले स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंगा में रोजाना नाव से लादकर मलबे की बोरियां फेंकी जा रही हैं। वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि आरोप निराधार है, यह मलबा नहीं बालू की बोरियां हैं। काशी विश्वनाथ धाम के तहत ललिता घाट पर सांस्कृतिक आयोजनों के लिए मंच बनाया जाएगा। यहीं से श्रद्धालु गंगा स्नान करके बाबा के धाम में प्रवेश करेंगे। मंच के निर्माण के लिए घाट का विस्तारीकरण किया जा रहा है। घाट का ऊंचाई बढ़ाने के लिए गंगा के दूसरे तरफ से बालू निकालकर डाला जा रहा है।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि ललिता घाट पर मलबा नहीं बालू की बोरियां डाली जा रही हैं। घाट पर दीवाल बनाने के लिए बालू की बोरियां डालकर बेस तैयार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप गलत है। गंगा में कोई मलबा नहीं डाला जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण कार्य जनवरी से ही चल रहा है। लॉकडाउन के कारण काम बीच में बंद था लेकिन फिर से काम शुरू हो गया है। मणिकर्णिका घाट से ललिता घाट के बीच ध्वस्तीकरण के बाद समतलीकरण काम जेसीबी से कराया जा रहा है।