महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और उससे संबद्ध महाविद्यालयों (स्ववित्तपोषित महाविद्यालय को छोड़कर) में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ाने वाले संविदा शिक्षक भी अब छात्रों को शोध करवा सकेंगे।
शिक्षक को-गाइड यानी सह निदेशक की भूमिका में रहेंगे। विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. एके त्यागी की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई। इसमें एक शिक्षक के निर्देशन में दो छात्र शोध कर सकेंगे।
विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक के निर्देशन में छात्र शोध करते हैं लेकिन महाविद्यालयों में संविदा शिक्षकों के पास यह अधिकार नहीं था। अब काशी विद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक के बाद संविदा शिक्षकों को यह अधिकार मिल गया है।
कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने बताया कि बैठक में विद्यापरिषद, कार्यपरिषद, वित्त समिति, भवन समिति की पूर्व बैठकों के कार्यवृत्त/निर्णय को अनुमोदित किया गया। इसमें संविदा शिक्षकों को शोध छात्र का को-गाइड बनाने पर सहमति प्रदान की गई। इसके साथ ही स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के संविदा शिक्षकों का वेतन पुनर्निधारण कर वेतन वृद्धि पर कार्यपरिषद ने स्वीकृति प्रदान की है।
एनटीपीसी परिसर एवं गंगापुर परिसर में धर्मविज्ञान एवं कर्मकांड विषय के लिए एक पद का सृजन भी किया गया। इसके अलावा अतिथि अध्यापकों का मानदेय 20 हजार से बढ़ाकर अधिकतम 30 हजार रुपये कर दिया गया। जिन शिक्षकों का एक साल का परीक्षाकाल पूरा हो गया, उनका स्थायीकरण किया गया।
बैठक में कार्य परिषद के सदस्य न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार (से.नि.), धर्म प्रकाश गुप्ता, प्रो. अजय तनेजा, डॉ. विनोद कुमार सिंह, प्रो. सुधीर कुमार शुक्ला, प्रो. संतोष कुमार, प्रो. निरंजन सहाय सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।