यदि औसत और मूल प्राप्तांक में 20 फीसदी का अंतर हुआ तो मूल परीक्षक को नोटिस भेजा जाएगा। पारिश्रमिक रोकने के साथ ही दो साल के लिए परीक्षा मूल्यांकन से डी बार कर दिया जाएगा। कार्यवाही को परीक्षक की सर्विस बुक में भी दर्ज किया जाएगा। साथ ही छात्र को 1000 रुपये मूल्यांकन शुल्क काटकर वापस किया जाएगा।
कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्या ने बताया कि छात्रों के हित में चुनौती मूल्यांकन की सुविधा को लागू किया जा रहा है। परीक्षा समिति ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है। नए सत्र से छात्रों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा।