मानसरोवर घाट पर काशी तेलुगु संगमम
- फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी ने कहा, आपको याद होगा कि कुछ महीने पहले यहीं की धरती पर काशी तमिल संगमम हुआ था। अभी कुछ ही दिन पहले मुझे सौराष्ट्र तमिल संगमम में शामिल होने का अवसर मिला। तब मैंने कहा आजादी का यह अमृत काल देश की विविधताओं का और विविध धाराओं का संगम काल है। विविधताओं के इस संगम से राष्ट्रीयता का अमृत निकल रहा है जो भारत को अनंत भविष्य तक ऊर्जावान रखेगा। काशी से जुड़ा हर व्यक्ति जानता है कि काशी और काशीवासियों का तेलुगु लोगों से कितना गहरा रिश्ता है।
ये भी पढ़ें: मि
ट्टी में मिला माफिया मुख्तार का राजनीतिक भविष्य, गुनाह गिनते-गिनते थक जाएंगे
जैसे ही काशी में कोई तेलुगु व्यक्ति आता है तो कई काशीवासियों को लगता है कि उनके ही परिवार का कोई सदस्य आ गया है। काशी के लोग पीढ़ियों से आपका स्वागत कर रहे हैं। काशी जितनी प्राचीन है उतना ही प्राचीन ये रिश्ता भी है। काशी जितनी पवित्र है उतनी पवित्र तेलुगु लोगों की काशी में आस्था है। आज भी जितने तीर्थ यात्री काशी आते हैं उनमें बहुत बड़ी संख्या आंध्र प्रदेश व तेलांगना के लोगों की होती है। राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिम्हा ने प्रधानमंत्री के भाषण का तेलुगु में अनुवाद किया। इस दौरान घाट पर गंगा आरती, वेद पाठ, आशीर्वचन और स्तोत्र पाठ के साथ ही सांस्कृतिक आयोजन भी हुए।
काशी तेलुगु संगमम को संबोधित करते पीएम मोदी
- फोटो : सोशल मीडिया
पीएम ने कहा कि तेलुगु राज्यों ने काशी को कितने महान संत दिए। कितने ही आचार्य व मनीषी दिए हैं। काशीवासी और तीर्थयात्री जब बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं तो तैलंग स्वामी का आशीर्वाद लेने उनके आश्रम भी जाते हैं। उनको साक्षात काशी का जीवंत शिव कहते थे। तैलंग स्वामी का जन्म विजयनगर में हुआ था। ऐसे कितनी ही महान आत्माएं हैं जिन्हें आज भी काशी में स्मरण किया जाता है।
भाइयों-बहनों काशी ने तेलुगु लोगों को अपनाया, आत्मसात किया वैसे ही तेलुगु लोगों ने भी काशी को अपनी आत्मा से जोड़कर रखा है। यहां तक की पवित्र पीठ वेमुलावाड़ा को भी दक्षिण काशी कहा जाता है। आंध्र व तेलांगना के मंदिरों में जोकाला सूत्र हाथ में बांधा जाता है उसे आज भी काशीतारम कहते हैं।