काशी और तमिलनाडु का रिश्ता गहरा है। काशी के हनुमान घाट, केदारघाट, हरिश्चंद्र घाट पर मिनी तमिलनाडु बसता है। जहां एक दो नहीं बल्कि दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों के हजारों परिवार बसते हैं, जो इन दोनों राज्यों के मधुर रिश्ते को दर्शाते हैं। केवल हनुमान घाट पर 150 से ज्यादा घर तमिल परिवारों के हैं। यहां गलियों में हर दिन काशी तमिल संगमम होता है।
ये बातें काशी तमिल संगमम में शामिल पं. वेंकट रमण घनपाठी ने कहीं। वह मंगलवार को हनुमान घाट पर काशी तमिल संगमम के प्रतिनिधियों से रूबरू थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आयोजित यह संगमम उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत के संगम का श्रेष्ठ उदाहरण बन चुका है। प्रतिभागियों का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी की एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना इस आयोजन में जीवंत होती दिख रही है। काशी तमिल संगमम में तमिलनाडु से आया कृषि और संबद्ध समूह हनुमान घाट पहुंचा। सभी ने गंगा में स्नान कर मां का पूजा पाठ करते हुए सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद तमिल समूह हनुमान घाट स्थित सुब्रह्मण्यम भारती के घर पहुंचा। उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। सुब्रह्मण्यम भारतीय के घर पर भ्रमण करने कह्बाद यह समूह कांची मठ पहुंचा और वहां के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की। काशी में दक्षिण भारतीय मंदिर को देखकर शिक्षकों का दल उत्साहित नजर आया।