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हाईटेक निगरानी का असर: कोलकाता, जयपुर, बंगलूरू से ज्यादा मजबूत काशी का सुरक्षा कवच, ट्रैफिक प्रबंधन भी बेहतर

Wed, 08 Jul 2026 03:33 PM IST
Pragati Chand रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में हाईटेक निगरानी के चलते अपराध का ग्राफ घट गया है। यहां पिछले तीन वर्षों में हत्या के मामले में 15%, वहीं चोरी, छेड़खानी समेत अन्य आपराधिक घटनाओं में 30% कमी आई है।
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कैमरे ने बदली कानून व्यवस्था की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी ने सुरक्षा के क्षेत्र में भी देश के बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है। प्रति वर्ग मील 92 कैमरों की उपलब्धता के साथ वाराणसी का निगरानी तंत्र जयपुर, बंगलूरू, पटना और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों से ज्यादा सघन है। शहर के 720 प्रमुख लोकेशन पर लगाए गए कैमरों ने अपराध नियंत्रण के साथ ही ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत किया। 

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पिछले तीन वर्षों में हत्या के मामले में 15%, वहीं चोरी, छेड़खानी समेत अन्य आपराधिक घटनाओं में 30% कमी आई है। 75% मामलों के खुलासे में सीसीटीवी कैमरे पुलिस के सबसे मजबूत साक्ष्य साबित हुए हैं। 

एनसीआरबी, एसबीआई रिसर्च और स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता, बंगलूरू, कानपुर, पुणे, जयपुर, सूरत, अहमदाबाद, पटना समेत अन्य शहरों की अपेक्षा प्रति वर्ग मील बनारस में कैमरों की संख्या 92 है। जबकि इन शहरों में कहीं 60, 56, 18 इससे भी कम की संख्या है। स्मार्ट सिटी के तहत बनारस में 2200 कैमरे लगे हैं। 800 कैमरे ट्रैफिक विभाग ने लगवाए हैं। 
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एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर शिवहरी मीणा ने बताया कि शहर में होने वाली लगभग 75% आपराधिक घटनाओं के खुलासे में कैमरों की फुटेज अहम कड़ी साबित हुई है। कैमरों की मदद से जाम की स्थिति का रियल टाइम विश्लेषण होता है। जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक पुलिस तुरंत वैकल्पिक रूट लागू करती है। रेड लाइट उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग पर भी कैमरों के जरिये कार्रवाई की जा रही है। शहरी क्षेत्र में 4500 से ज्यादा कैमरे लगे हैं, जो सिटी कमांड कंट्रोल रूम से जुड़े हैं। 

ग्रामीण क्षेत्र में कैमरों की कमी, शहर की अपेक्षा चोरी की घटनाएं ज्यादा
शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले ज्यादा दर्ज किए गए। औसतन एक महीने में 35-40 मामले दर्ज होते हैं। सीसी कैमरों की कमी की वजह से पुलिस विवेचना में 60 दिनों से ज्यादा का समय लग जाता है। रोजाना दो से तीन मामले किशोरियों, महिलाओं के लापता होने के आते हैं। ज्यादातर मामलों में पुलिस को बरामदगी में ज्यादा समय लग जाता है। यहां सूचना तंत्र के भरोसे पुलिस काम करती है।

75 फीसदी मामलों में कैमरों ने जुटाए सुराग, हत्या में 15 और लूट में 30 प्रतिशत की आई कमी
  • 2024 में शहर के भदैनी में गुप्ता परिवार सामूहिक हत्याकांड, जिसमें 336 घंटे की फुटेज पुलिस ने खंगाली और शिनाख्त की
  • 2025 में सराफा शोरूम में तीन करोड़ की चोरी में पुलिस सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपियों तक पहुंची व खुलासा किया
  • 2025 में बड़ागांव में गोली मारकर हत्या के मामले में खुलासे में इन कैमरों ने पुलिस की मदद दी। इससे आरोपी पकड़े गए
  • 2025 आईआईटी बीएचयू की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कैमरों की मदद से तीन आरोपियों को चिह्नित किया गया
  • बिहार के चेन स्नेचिंग गिरोह को पकड़ने में कैमरों ने मदद की। 2024 नदेसर में दुष्कर्म के बाद किशोरी की हत्या का खुलासा
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बड़े शहरों में सुरक्षा पर खर्च होते हैं 720 करोड़ रुपये
प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 2026-2027 में 44 हजार 145 करोड़ का बजट का प्रावधान है जो प्रमुख मदों में खर्च होने हैं। बड़े शहरों लखनऊ, नोएडा, आगरा, वाराणसी, कानपुर, मेरठ समेत अन्य में अनुमानित दायरा 720 करोड़ रुपये है। इसमें प्रति व्यक्ति सुरक्षा से जोड़कर देखें तो वाराणसी के लोगों पर तीन से पांच हजार रुपये सरकार सुरक्षा पर खर्च कर रही है।
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