इस बार के आयोजन में काशी प्रांत के ऐसे लोगों को आमंत्रित किया गया है जिनको राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में नहीं आमंत्रित किया गया था। इसमें चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, जौनपुर, मछलीशहर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रयागराज, कौशांबी के आदिवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और विशिष्ट समुदाय से जुड़े लोग शामिल हैं। काशी प्रांत से अयोध्या पहुंचने वालों के लिए कारसेवकपुरम में ठहरने का इंतजाम किया गया है।
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काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि विवाह पंचमी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इसमें ध्रुव योग, सर्वार्थ सिद्धि और शिववास योग हैं। ध्रुव योग स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक है। इसमें किए गए कार्य लंबे समय तक स्थिर रहते हैं। उनका फल स्थायी होता है। सर्वार्थ सिद्धि का अर्थ है सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला योग। यह योग सभी प्रकार के शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के लिए बेहद कल्याणकारी होता है। विवाह पंचमी के दिन शिववास योग का संयोग भी निर्मित हो रहा है। इस योग से भगवान शिव के विराजमान होने का संयोग बन रहा है।