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तमिलनाडु के कण-कण में बसती है काशी: कुंभकोणम में विराजमान हैं काशी विश्वनाथ, द्रविड़ और चोल वास्तुकला की झलक

Thu, 17 Nov 2022 10:26 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कई शहरों में श्री काशी विश्वनाथ की प्रतिकृति और काशी के नाम वाले मंदिर स्थापित हैं। कुंभकोणम और तेनकाशी में काशी विश्वनाथन मंदिर है। तेनकाशी को तो दक्षिण की काशी कहा जाता है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि तमिलनाडु के कुंभकोणम शहर के बीचोबीच काशी विश्वनाथ मंदिर स्थापित है। 7
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कुंभकोणम में विराजमान हैं श्री काशी विश्वनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शैव परंपरा को मानने वालों के इष्ट भगवान शिव उत्तर और दक्षिण को एकाकार करते हैं। यही कारण है कि तमिलनाडु के कण-कण में काशी और बाबा विश्वनाथ विराजमान हैं। कई शहरों में श्री काशी विश्वनाथ की प्रतिकृति और काशी के नाम वाले मंदिर स्थापित हैं। कुंभकोणम और तेनकाशी में काशी विश्वनाथन मंदिर है। तेनकाशी को तो दक्षिण की काशी कहा जाता है। 

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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि तमिलनाडु के कुंभकोणम शहर के बीचोबीच काशी विश्वनाथ मंदिर स्थापित है। 72 फीट ऊंचे मंदिर की स्थापना 16वीं सदी में हुई थी। चोल वास्तुकला पर मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर में भगवान शिव माता विशालाक्षी के साथ भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने यहां भगवान शिव से रावण पर विजय की कामना की थी।  
काशी के प्रति तमिल समुदाय की श्रद्धा ही है जो तमिलनाडु में काशी नाम से कुडलोर जिले में वृद्धाचलम शहर बसता है। इसका दूसरा नाम वृद्ध काशी भी है। जिसकी तमिल समुदाय में काशी के समान ही मान्यता है। इसे थिरूमुधुकुंद्रम और पाझामलाई भी कहा जाता है। वहीं, वैगाई नदी के किनारे और मदुरई से 20 किलोमीटर दूर रामेश्वर हाईवे पर पुष्पवन काशी बसती है। गंगई जिले में बसे तिरूपुवन के लिए दक्षिण में मान्यता है कि जो काशी नहीं जा पाते हैं, उन्हें यहां दर्शन और वास का वही पुण्य मिलता है जो काशीवास व दर्शन का है। इसे तिरूपुवनम के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग की छवि पारिजात फूल की तरह है, इसलिए यहां भगवान शिव को पूवना नाथर कहा जाता है।

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द्रविड़ और पांड्यन शासकों ने कराया शिव मंदिरों का निर्माण - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण की काशी है तेनकाशी
पांड्यन शासकों द्वारा तेनकाशी में बनवाया गया श्री काशी विश्वनाथ मंदिर दक्षिण भारतीय समुदाय के आस्था का केंद्र है। यहां स्थापित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को उल्गाम्मन मंदिर के नाम से जाना जाता है। पांड्यन शासक पराक्रमा पांड्या ने निर्माण कराया था। मंदिर की खासियत 150 फीट का गोपुरा है। द्रविड़ शैली में निर्मित मंदिर का गोपुरा बेहद भव्य व आकर्षक है। मंदिर के खंभों पर बेहद सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर में भगवान शिव के अलावा भगवान अम्माम और मुरुगन के विग्रह भी स्थापित हैं। जिस तरह से बनारस में गंगा प्रवाहमान हैं उसी तरह तेनकाशी में भी चित्तर नदी बहती है।
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