कुंभकोणम में विराजमान हैं श्री काशी विश्वनाथ
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शैव परंपरा को मानने वालों के इष्ट भगवान शिव उत्तर और दक्षिण को एकाकार करते हैं। यही कारण है कि तमिलनाडु के कण-कण में काशी और बाबा विश्वनाथ विराजमान हैं। कई शहरों में श्री काशी विश्वनाथ की प्रतिकृति और काशी के नाम वाले मंदिर स्थापित हैं। कुंभकोणम और तेनकाशी में काशी विश्वनाथन मंदिर है। तेनकाशी को तो दक्षिण की काशी कहा जाता है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि तमिलनाडु के कुंभकोणम शहर के बीचोबीच काशी विश्वनाथ मंदिर स्थापित है। 72 फीट ऊंचे मंदिर की स्थापना 16वीं सदी में हुई थी। चोल वास्तुकला पर मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर में भगवान शिव माता विशालाक्षी के साथ भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने यहां भगवान शिव से रावण पर विजय की कामना की थी।
काशी के प्रति तमिल समुदाय की श्रद्धा ही है जो तमिलनाडु में काशी नाम से कुडलोर जिले में वृद्धाचलम शहर बसता है। इसका दूसरा नाम वृद्ध काशी भी है। जिसकी तमिल समुदाय में काशी के समान ही मान्यता है। इसे थिरूमुधुकुंद्रम और पाझामलाई भी कहा जाता है। वहीं, वैगाई नदी के किनारे और मदुरई से 20 किलोमीटर दूर रामेश्वर हाईवे पर पुष्पवन काशी बसती है। गंगई जिले में बसे तिरूपुवन के लिए दक्षिण में मान्यता है कि जो काशी नहीं जा पाते हैं, उन्हें यहां दर्शन और वास का वही पुण्य मिलता है जो काशीवास व दर्शन का है। इसे तिरूपुवनम के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग की छवि पारिजात फूल की तरह है, इसलिए यहां भगवान शिव को पूवना नाथर कहा जाता है।