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काशी राजघराने में विवाद, बहन के आरोपों के बाद मीडिया के सामने आए अनंत नारायण सिंह, ये कहा

Sat, 01 Sep 2018 01:19 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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काशी राजपरिवार के अनंत नारायण सिंह - फोटो : amar ujala
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काशी राजघराने में आपसी विवाद को लेकर नया मामला सुर्खियों में है। काशी स्टेट का प्रतीक चिह्न छापे जाने को लेकर भाई और बहन आमने- सामने हैं। शुक्रवार को नदेसर स्थित एक होटल में पत्रकारों से बात करते हुए काशी राजपरिवार के अनंत नारायण सिंह ने कहा कि विवाह के बाद पुत्रियों का पिता के घर रहना कैसी परंपरा है।
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पिता ने पुत्रियों का विवाह संपन्न परिवार में करने के साथ ही उनके अलग-अलग रहने की अच्छी व्यवस्था भी की। इसलिए बहनों को चाहिए कि वे किले से बाहर चली जाएं। अनंत नारायण सिंह ने कहा कि बहन कृष्णप्रिया के कारण विवश होकर मीडिया के सामने आया हूं। मैं अपनी वंश परंपरा का सही तरीके से निर्वहन कर रहा हूं और काशीवासियों से उन्हें उचित सम्मान मिलता है। पिता की मृत्यु के बाद बहनों की नजर हमारी संपत्ति पर है। इसी वजह से बार-बार हमें परेशान किया जा रहा है।

काशी राज परिवार के रार अब सार्वजनिक हो चुकी है। बीते दिनों अनंत नारायण सिंह की ओर से काशी स्टेट के राजकीय चिह्न के दुरुपयोग के आरोप में बहन हरिप्रिया के खिलाफ रामनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद दूसरी बहन कृष्णप्रिया ने अनंत नारायण सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे।
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जवाब में अनंत नारायण सिंह ने कहा कि हमारी बहनें किले में लाइसेंसी की हैसियत से रह रही हैं। काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह ने तीनों बहनों की शादी के साथ ही उन्हें बैराठ फार्म, कटेसर, नदेसर और बिहार के समस्तीपुर में अचल संपत्तियां दी। काशी नरेश की मृत्यु के बाद बहनों ने 2005 से मुकदमेबाजी शुरू की और यह सिलसिला जारी है।

बहनें हमारी पत्नी पर अमर्यादित टिप्पणी करती हैं

काशी राजपरिवार के अनंत नारायण सिंह - फोटो : amar ujala


पूर्व काशी नरेश ने 2000 में हमारे नाम वसीयतनामा लिखा है। काशी स्टेट के राजकीय चिह्न का गद्दीनशीन ही उपयोग कर सकता है। इसके अलावा इस राजकीय चिह्न को ट्रेडमार्क के तौर पर हमने रजिस्ट्रेशन करा रखा है। हमारी अनुमति के बगैर इसका उपयोग कोई नहीं कर सकता।

बहनों के कारण मैं परिवार की परंपरा के अनुसार निवास में विजयादशमी के दिन दरबार नहीं कर रहा हूं। विजयादशमी और होली पर कुलदेवी का दर्शन नहीं कर पा रहा हूं। बहनें हमारी पत्नी पर अमर्यादित टिप्पणी करती हैं। इन हालात में 2011 में उन्होंने बहनों से सारे रिश्ता खत्म कर लिए। 
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कुंवर न कहें..

रामनगर किला - फोटो : अमर उजाला
अनंत नारायण सिंह ने कहा कि उनके लिए कुंवर शब्द का प्रयोग न किया जाए। उन्हें पूर्व काशी नरेश जैसा सम्मान दिया जाए। आप सबकी जो इच्छा हो वो संबोधन दे सकते हैं। इस दौरान कई बार अनंत नारायण सिंह की आंखें डबडबाईं, गला रुंधा...। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ की शरण में हूं। वह जैसे रखेंगे, वैसे रहूंगा।
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