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काशी से पूरी दुनिया में जाता है शांति का संदेश

Mon, 21 Dec 2015 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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उपनिषद एवं गीता शांति -सद्भाव के प्रतीक हैं। काशी अपार ऊर्जा और अध्यात्म से भरा शहर है, जहां से पूरी दुनिया संदेश प्राप्त करती है।
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 ये बातें रविवार को प्रख्यात मानवतावादी चिंतक और आध्यात्मिक श्रीएम ने कहीं। वे कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा के दौरान बीएचयू पहुंचे थे।
बीएचयू में शताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ‘इंटरनेशनल सम्मिट ऑन पीस एंड हारमनी’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के विशेष सलाहकार अदामा डेंग ने कहा कि यूएन की ओर से आयोजित होने वाले क्षेत्रीय शांति सम्मेलनों के लिए बनारस सबसे उपयुक्त जगह है। कहा कि दुनिया में राजनीतिक एवं सामाजिक अस्थिरता बढ़ती हिंसा की मुख्य वजह है। दुनिया में शांति का कोई भी रास्ता भारत से होकर जाएगा।
अमेरिका के मैन विश्वविद्यालय से आए  प्रो. डगलस एलेन ने कहा कि संघर्ष को हिंसा से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए गांधी के अहिंसा की तकनीक को अपनाकर ही दुनिया में शांति की स्थापना की जा सकती है। अध्यक्षता करते हुए अशोक सज्जनहार ने सीरिया, इराक और दूसरे देशों में बढ़ रही अशांति पर चिंता जताई।
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बीएचयू के कुलाधिपति डॉ. कर्ण सिंह ने शांति एवं सद्भाव के इस समागम में शांति को न्याय के साथ जुड़ा बताया। उन्हाेंने क्षेत्रीय एवं सामाजिक शांति के लिए व्यक्तिगत एवं आंतरिक शांति की जरूरत पर जोर दिया। उनका मानना था कि स्त्री-पुरुष समानता एवं संतान अभिभावक संबंधों को नए तरीके से परिभाषित किया जाए।
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अध्यक्षीय संबोधन में बीएचयू के कुलपति  प्रो. जी.सी. त्रिपाठी ने संतुलित विश्व के लिए अखंड एवं एकात्म तार्किकता को अनिवार्य बताया। कहा कि समाज लेने वालेे और देने वाले के बीच संतुलन से चलता है जिसे किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ा जाना चाहिए। यूनेस्को चेयर प्रोफेसर प्रियंकर उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन रीना बराल शोध छात्रा ने किया। धन्यवाद प्रो. धनंजय पांडेय ने दिया।
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