मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वरुणा कॉरिडोर’ के काम में आई तेजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिस प्रकार जेएनएनयूआरएम के तहत बगैर एसटीपी का निर्माण कराए सीवर पाइन लाइन डालने के लिए पूरे शहर को खोद डाला गया था। उसी प्रकार एक बार फिर से वरुणा में नालों को गिरने से रोकने के पहले ही ड्रेजिंग का काम शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि वरुणा में विकास की उल्टी गंगा बहाने वाले अधिकारी 174 करोड़ रुपये की योजना के स्वीकृत 15 करोड़ रुपये खपाने में लगे हैं।
किसी भी नदी को स्वच्छ करने के लिए पहले उसके नालों को बंद किया जाता है लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। पहले ही ड्रेजिंग करा दी जा रही है। जबकि, इसका फायदा तभी होगा जब नालाें को पूरी तरह से बंद कराया जाए। अभी ड्रेजिंग हो भी जाए तो नालों के जरिए कचरा वरुणा में ही जाएगा। लिहाजा, फिर से ड्रेजिंग की आवश्यकता होगी।
जल निगम ने योजना बनाई है कि नदियों के दोनों किनारे पर सीवर की पाइप लाइन डालेंगे। इसके जरिए वरुणा में गिरने वाले सीवर को दीनापुर तक ले जाएंगे। वहां उसे शोधित करने केबाद पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वरुणा कॉरिडोर के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद अहम है और पहले इस योजना को पूरा करने की आवश्यकता है लेकिन इस पर अभी कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। अलबत्ता, ड्रेजिंग का काम शुरू करा दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को क्या जेएनएनयूआरएम का हश्र याद नहीं है या फिर जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है।