वाराणसी। कलशों में गंगा जल लिए भक्तों की लंबी कतारें और बैरीकेडिंग के बीच घंटों इंतजार। न बारिश की फिक्र न चिलचिलाती धूप की। सावन के पहले सोमवार को देवाधिदेव की नगरी काशी की सड़कों पर भोले भक्तों का न डिगने वाला उत्साह ऐसा ही था। बोल बम के जयकारे लगाते हुए हर तरफ से कांवरिए बाबा के दरबार की ओर उमड़ते नजर आए। धक्कामुक्की के बीच कोई 12 घंटे तो कोई 16 घंटे इंतजार के बाद बाबा के दर तक पहुंचा। शाम तक एक लाख से अधिक भक्तों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा। पहली बार सुबह सात बजे ही लक्सा थाने के पास से दशाश्वमेध होते हुए गोदौलिया से वापस आकर बांसफाटक से छत्ताद्वार तक एक लाइन लगी तो दूसरी कतार दोपहर बाद एक बजे तक मैदागिन से आगे कोतवाली तक पहुंच गई। इस दौरान कहीं भक्त बैरीकेडिंग के बीच बैठ कर सुस्ताते दिखे तो कहीं हर-हर बम-बम के जयकारों के साथ उत्साह भरते रहे। मंगला आरती के बाद चार बजे भोर से जलाभिषेक शुरू हुआ। सुबह नौ बजे तक 50 हजार भक्तों
ने बाबा का जलाभिषेक किया था। दिन के 12 बजे तक यह आंकड़ा 70 हजार तक पहुंच गया। कतार के बीच में कुछ लोगों के जबरिया घुसने पर कई बार शोर-शराबा भी हुआ। हालांकि कड़े सुरक्षा इंतजाम के चलते भक्तों की राह में इस बार रोड़े कम नजर आए। नेताओं, अफसरों को भी मैदागिन और गिरजाघर से ही पैदल कर दिया जा रहा था। इस वजह से वीआईपी के नाम पर जलाभिषेक मार्ग पर सिर्फ
पैदल लोग ही गुजर सके। इससे जाम नहीं लगा और शाम चार बजे तक कतार सिमट गई। दिन में कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने चहेतों को सरस्वती फाटक और छत्ताद्वार से मंदिर में प्रवेश कराने की कोशिश की लेकिन विरोध के चलते उन्हें पीछे हटना पड़ा। शाम 5:30 बजे के बाद वीआईपी भक्तों के लिए दर्शन की छूट प्रशासन ने दी। इससे पहले रविवार की रात 11 बजे ही लंबी लाइन लग गई थी। रात को हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद भक्तों की आस्था नहीं डिगी।