कारोबारी अंजली जायसवाल बताती हैं कि इस बार रुद्राक्ष की माला, ब्रेसलेट और लॉकेट की काफी डिमांड है। बाजार में नेपाल और इंडोनेशिया से आए दुर्लभ रुद्राक्ष की मालाओं की खेप पहुंची है। एक मुखी से लेकर चौदह मुखी रुद्राक्ष और गौरी-शंकर रुद्राक्ष डिमांड में है। विशेष रूप से नेपाल के बड़े दानों वाले रुद्राक्ष की मांग सबसे अधिक है।
जानकारों के अनुसार, रुद्राक्ष और उससे बनी मालाओं का कारोबार इस सीजन में कई करोड़ का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है, क्योंकि महाशिवरात्रि की रात सिद्ध किए गए रुद्राक्ष धारण करने की पुरानी परंपरा है। रुद्राक्ष के माला की कीमत 200 रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक है।
इस बार पारा के शिवलिंग और नर्मदेश्वर शिवलिंग की अच्छी बिक्री हो रही है। नर्मदेश्वर शिवलिंग की गृहस्थ लोग खरीदारी कर रहे हैं। इसकी साइज छोटी होने के कारण लोग इसे आसानी से मंदिर में स्थापित कर देते हैं। वहीं, पारे के शिवलिंग की भी अधिक डिमांड है। इसकी 100 ग्राम की कीमत 2500-3000 रुपये है।
अर्दली बाजार के पूजा सामग्री विक्रेता विनय कुमार बताते हैं कि इस बार पूजा-पाठ से जुड़े सामान जैसे चंदन, भस्म, इत्र, बेलपत्र, भांग-धतूरा और शृंगार की अन्य वस्तुओं का व्यापार 80 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा। इसके अलावा झंडा, धतुरा आदि की भी डिमांड पिछले वर्ष की अपेक्षा बढ़ी है। महाशिवरात्रि पर लोग पूजा सामानों के अलावा रुद्राभिषेक के सामान की भी खरीदारी कर रहे हैं।
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पीतल और तांबे के इन सामानों की अधिक डिमांड
तांबे का लोटा, अभिषेक शृंगी, पंचपात्र और आचमनी, अभिषेक स्टैंड, पंच आरती दीया, अखंड ज्योति दीप, धूप दानी, घंटी व शंख स्टैंड, पीतल का त्रिशूल और डमरू, पीतल का नाग, शिव परिवार की मूर्तियां, नंदी की मूर्ति, पीतल की पूजा थाली आदि।