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काशी में चंद्रशेखर बने थे ‘आजाद’

Fri, 12 Aug 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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आजाद जयंती - फोटो : Self
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आजादी के आंदोलन में वैसे हजारों लोगों की कोई न कोई भूमिका रही मगर इनमें चंद्रशेखर आजाद वह जांबाज क्रंातिकारी थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। चंद्रशेखर का जन्म तो उन्नाव के बदरका गांव में पंडित सीताराम तिवारी के घर 23 जुलाई, 1906 को हुआ था मगर क्रांतिकारियों के गढ़ बनारस में चंद्रशेखर बचपन में ही संस्कृत की पढ़ाई करने आ गए थे। चंद्रशेखर तिवारी से ‘चंद्रशेखर आजाद’ नामकरण भी यहीं हुआ था।
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चंद्रशेखर 15 साल के थे, जब 1921 में जलियावाला बाग हत्याकांड हुआ था। पूरा देश उद्धेलित हो उठा था। गांधी जी ने असहयोग आंदोलन छेड़ रखा था। बनारस भी आंदोलन से अछूता नहीं था। छात्रों का एक जत्था विदेशी कपड़ों की दूकान के बाहर प्रदर्शन कर रहा था तभी पुलिस पहुंच गई और लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। लाठियों से फटा हुआ सिर देखकर एक बालक से नहीं रहा गया और उसने दरोगा पर पत्थर चला दिया। यह बालक चंद्रशेखर आजाद थे।

आजाद पकड़े गए और उन्हें अगले दिन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जब मजिस्ट्रेट ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम आजाद, मां का नाम धरती और पिता का स्वतंत्रता और घर जेलखाना बताया था। मजिस्ट्रेट ने उनके इस तेवर पर 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल में जेलर आजाद की पीठ पर कोड़े बरसाता रहा और वह भारत माता के जयकारे लगाते रहे। इस घटना के बाद सुर्खियों में आए आजाद को जेल से रिहा होने के बाद लोगों ने कंधे पर बिठाकर शहर में घुमाया।
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