फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाराणसी: अन्नपूर्णा मंदिर के महंत को दी गई भू समाधि, काशी की जनता ने किया अंतिम प्रणाम

Sun, 11 Jul 2021 11:49 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

काशी अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी का शनिवार को वाराणसी के महमूरगंज स्थित एक निजी चिकित्सालय में निधन हो गया था। महंत पिछले 10 दिनों से लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। चिकित्सकों ने जब जवाब दे दिया तो शुक्रवार की रात उन्हें मेदांता से लाकर महमूरगंज स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार की दोपहर 3:30 बजे उन्होंने शरीर त्याग दिया।
विज्ञापन
महंत को भू समाधि के लिए ले जाते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वाराणसी के अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी(67) महाराज को रविवार को भू समाधि दी गई। देर रात अखाड़े के संतों ने भू समाधि दिलाने का निर्णय लिया। भोर में सुबह पांच बजे उनके पार्थिव शरीर का अभिषेक कराया गया। इसके बाद रुद्राक्ष तुलसी और फूलों की माला अर्पित की गई। महंत के पार्थिव शरीर को सिंहासन पर विराजमान कराकर आरती उतारी गई।

विज्ञापन


उपमहंत शंकर पुरी की अगुवाई में महंत की अंतिम यात्रा मंदिर प्रांगण से आरंभ हुई। मंदिर परिवार के सदस्यों ने कंधे पर महंत का सिंहासन उठाया, और बांस फाटक पहुंचे। वहां से अंतिम यात्रा शिवपुर स्थित ब्रह्मचर्य ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय के प्रांगण में पहुंची। वैदिक मंत्रों के बीच महंत को भू समाधि दी गई।

इस दौरान सीएम के दूत के रूप में पहुंचे धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर महानिर्वाणी अखाड़े के संत, काशी का संत समाज, प्रमुख मंदिरों के महंत, राजनीतिक पार्टियों के सदस्य और काशी की जनता मौजूद रही।

विज्ञापन

काशी अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी जी। - फोटो : अमर उजाला
महंत का शनिवार को महमूरगंज स्थित एक निजी चिकित्सालय में निधन हो गया था। उपमहंत शंकर पुरी ने बताया कि महंत रामेश्वर पुरी पिछले 10 दिनों से लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। उनकी हालत चिंताजनक थी। चिकित्सकों ने जब जवाब दे दिया तो शुक्रवार की रात उन्हें मेदांता से लाकर महमूरगंज स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार की दोपहर 3:30 बजे उन्होंने शरीर त्याग दिया। महंत रामेश्वर पुरी हरिद्वार में कुंभ स्नान के पहले ही कोराना संक्रमित हो गए थे। वहां से नई दिल्ली में इलाज कराने के बाद लखनऊ आ गए थे। इसके बाद ठीक होकर वह अन्नपूर्णा मंदिर लौटे थे।

मंदिर प्रबंधक ने बताया कि 2004 में तत्कालीन महंत त्रिभुवन पुरी के निधन के बाद रामेश्वर पुरी को 17 अक्तूबर 2004 में महानिर्वाणी अखाड़े से संबद्ध श्री अन्नपूर्णा मठ मंदिर की महंती दी गई थी। उनके नेतृत्व में काशी अन्नपूर्णा अन्न क्षेत्र ट्रस्ट निरंतर समाज सेवा क्षेत्र में विस्तार कर रहा था। उनके महंत बनने के समय अन्नक्षेत्र के रूप में ट्रस्ट का सिर्फ एक प्रकल्प संचालित था। आज शिक्षा, चिकित्सा, स्वावलंबन, वृद्धजन सेवा समेत तमाम कार्य किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

पीएम मोदी और मुख्यमंत्री ने जताया शोक
महंत के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि काशी अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी जी के देहावसान से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने धर्म और अध्यात्म को समाज सेवा से जोड़कर लोगों को सामाजिक कार्यों के लिए निरंतर प्रेरित किया। ॐ शांति !

महंत का सफरनामा-
- 7 जुलाई 1954 कानपुर के पास एक गांव में हुआ जन्म।
- 1991 में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी से शिवाला घाट पर सन्यास लिया।
- 1991 से 1993 तक गुजरात रहे
- 1993 में वाराणसी अन्नपूर्णा मंदिर आए और वहीं रहे। 2004 में अन्नपूर्णा मंदिर महंत की गद्दी पर बैठे।
- महंत रामेश्वरपुरी जब महंत की गद्दी पर बैठे तो सिर्फ  एक अन्नक्षेत्र चल रहा था, आज 14 निशुल्क संस्थाएं महंत के प्रयास से चल रही हैं। 
- उमा भारती महंत को अपना गुरु भाई मानती थीं।
- सीएम ने अन्नपूर्णा मठ मंदिर की सेवाओं की तारीफ की थी।
- पीएम के काशी दौरे पर कनाडा में मिली मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को काशी लाने पर हुई थी चर्चा।
- मंदिर की ओर से हर साल 25 गरीब कन्याओं का विवाह व सौ बटुकों का उपनयन संस्कार होता है। 
- 2004 में अन्नक्षेत्र में मात्र 20 लोग आते थे वर्तमान में कोविड काल से पहले पांच से सात हजार लोग रोजाना प्रसाद ग्रहण करते हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें