करपात्र रत्न से अलंकृत किए जाने पर प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि स्वामी करपात्री जी के नाम से जुड़ा यह सम्मान मिलना स्वयं को अभिभूत करने वाला है। संत मुरलीधर महाराज, प्रो. गोपबंधु मिश्रा, प्रो. उपेंद्र पांडेय, प्रो. सदाशिव द्विवेदी, प्रो. कमल नयन द्विवेदी, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो.उपेंद्र त्रिपाठी, डॉ. ब्रजभूषण ओझा आदि ने भी विचार रखे। अध्यक्षता धर्मसंघ के पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने की। संचालन पंडित जगजीतन पांडेय, स्वागत डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दयानिधि मिश्र ने किया।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय को अति प्रतिष्ठित करपात्र रत्न सम्मान के तौर पर एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र और श्रीफल प्रदान किया गया। वहीं डॉ. ददन उपाध्याय को करपात्र गौरव के साथ 21 हजार रुपये और पं. दयाशंकर त्रिपाठी को करपात्र कृपा सम्मान के साथ 11 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र दिया गया।
राष्ट्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष ऋतुराज अवस्थी ने कहा कि एक राष्ट्र-एक कानून की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। कहा, एक कानून समाज के कल्याण के लिए आवश्यक है। हमारा संविधान भी यही कहता है कि सभी नागरिक एक ही कानून से संचालित हों।