रक्तदान को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह की भ्रांतियां रहती हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। रक्तदान करने के बाद सेहत पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। चिकित्सकों के मुताबिक एक स्वस्थ मनुष्य को साल में चार बार स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए।
यह एक ऐसा महादान है, जिसको करने से दूसरों की जान बचाने का मौका मिलता है। इसलिए जरूरी है कि खुद रक्तदान करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित किया जाए। अक्सर यहीं देखने को मिलता है कि परिवार या किसी रिश्तेदारी में जरूरत पड़ने पर भी लोग खून नहीं देना चाहते हैं।
ऐसा इसलिए कि उन्हें खुद नहीं मालूम चल पाता है कि वह भी खून दे सकते हैं। ऐसे लोग या तो दूसरों को रक्तदान करने के लिए कहते हैं या फिर ब्लड बैंकों का चक्कर लगाते हैं। इस इंतजार में सबसे अधिक नुकसान उस मरीज का होता है, जिसे समय से खून नहीं मिल पाता है।
इसमें भी उन्हें समस्या अधिक होती है जिनके पास डोनर नहीं होता है, ऐसे समय में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का प्रयास रंग लाता है और ब्लड बैंक की ओर से बिना डोनर वाले मरीजों को खून मिल जाता है। हालांकि ब्लड बैंक के आंकड़े भी बहुत चौकाने वाले सामने आते हैं।
यहां हर साल जरूरत के हिसाब से स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों की संख्या बहुत कम होती है। इसी उद्देश्य के साथ ही बीएचयू ब्लड बैंक, आईएमए ब्लड बैंक सहित सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक की ओर से समय-समय पर शिविर का आयोजन कर लोगों से अपील की जाती है।