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दोस्त की शहादत याद आती है तो रात भर नींद नहीं आती

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वाराणसी। 1999 की गर्मियों के दिन थे। हम 22 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में नायक के पद पर तैनात थे। मई में पाकिस्तानी सैनिकों की घुसपैठ की पुष्टि हुई। इसके बाद हमारी बटालियन को आदेश मिला कि जुबार हिल के शीर्ष पर जाकर दुश्मनों से लोहा लेना है। हम लोग चढ़ाई शुरू की तो दुश्मन की तरफ से भारी गोलाबारी शुरू कर दी गई। हम लोग पहाड़ में ही खुद को बचाते रहे और रात होने पर वापस नीचे उतरे। अगली रात हम लोगों ने फिर चढ़ाई कर दुश्मनों से मोर्चा लेना शुरू किया। इस दौरान एक बम धमाके में हमारे हाथ की एक अंगुली खराब हो गई थी। हमारे कई साथी शहीद हुए, जिसमें से आज भी हमें हमारे दोस्त मोहम्मदाबाद, गाजीपुर निवासी जयप्रकाश यादव की शहादत को लेकर बहुत दु:ख होता है।
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यूं कहें तो जयप्रकाश की याद आती है तो फिर रात भर नींद ही नहीं आती है। हालांकि कारगिल युद्ध को लेकर आज भी मन रोमांचित हो उठता है कि हमने देश के दुश्मनों को उनकी औकात बता दी थी। हमें नीचे से ऊपर पहाड़ पर चढ़ना था, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी हम भारतीय सैनिक अपनी भारत भूमि की रक्षा के लिए जी-जान से लड़े और हमें जीत नसीब हुई। भारतीय फौजी के जीवन की सबसे बड़ी बात यही है कि वह अपने वतन की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाता है। इसीलिए हमारी भारतीय सेना दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेना में से एक मानी जाती है।
बेटे भानु को भेजेंगे सेना में, करा रहे तैयारी
परिवार में पत्नी सितारा देवी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। छोटे बेटे भानु को सेना में भेजेंगे और उसी के लिए तैयारी भी करा रहे हैं। भारतीय सेना सच्चे मायने में देश सेवा के लिए एक बहुत बड़ा मंच है। हमें सरकार से कोई शिकायत नहीं है। ऊपर वाले की मेहरबानी से जो कुछ भी मिला बहुत मिला। अब भी यदि भारतीय सेना की ओर से देश की सेवा का अवसर मिलेगा तो हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। - श्रीकिशन यादव, रिटायर्ड फौजी, रोहनिया क्षेत्र के दरेखू गांव निवासी
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