स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान पर गोवंश को चारा दिया जाता है, वहां जलभराव नहीं है। लेकिन भोजन और पानी ग्रहण करने के बाद आराम करने के लिए पशुओं को पर्याप्त सूखी जगह नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला के निर्माण के समय परिसर में पर्याप्त मिट्टी डालकर उसे ऊंचा किया जाता और पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था रहती तो बारिश में यह समस्या नहीं आती।
ग्रामीणों ने गोशाला परिसर में जमा पानी की तत्काल निकासी कराने के साथ ही भविष्य में जलभराव रोकने के लिए स्थायी जलनिकासी व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बेसहारा गोवंश को सुरक्षित आश्रय देने के उद्देश्य से संचालित गोशाला में पशुओं के रहने की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सीवीओ डॉ. विजय प्रकाश ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। इसे जल्द दिखवाया जा रहा है। पशुओं की सुरक्षा को लेकर जो भी आवश्यक उपाय होगा, वह किया जाएगा।