रजत मुखौटे का विधिवत शृंगार कर सिर पर मौर धारण कराया। बाबा के मुखौटे को सुसज्जित रथ पर विराजमान कराकर रथारूढ़ बाबा लाट भैरव के दिव्य मुखौटे के दमकते नेत्रों व ललाटाग्नि की शोभा भक्तों के समस्त सांसारिक कष्टों को हरने वाली सुखदायक थी।
बरात का नेतृत्व श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल ने शुभता का प्रतीक नारियल फोड़कर हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ बरात की शोभायात्रा निकाली। रथ पर बरात संयोजक विक्रम सिंह राठौर अपने सहयोगियों संग पारंपरिक परिधान धोती, कुर्ता, साफा में बैठे भक्तों के चढ़ावे बाबा को अर्पित करते नजर आए।
मार्ग में भक्त पुष्पवर्षा व आरती उतारकर बरात का स्वागत कर रहे थे। बरात हरतीरथ, विशेश्वरगंज चौराहा होते हुए काल भैरव मंदिर पहुंची। समिति ने बाबा का विशेष शृंगार कर आरती उतारी। इसके बाद बरात जतनबर, दूध कटरा, कतुआपुरा, अम्बियामंडी, बलुआबीर, हनुमान फाटक, तेलियाना होकर नउआ पोखरा स्थित लाट भैरव बाजार में जनवासे के लिए कुछ देर विश्राम के लिए रुकी।
डमरू दलों के सौ से अधिक सदस्य मार्ग में डमरुओं का गर्जना करते हुए चल रहे थे। मार्गभर में भक्त हाथों में पूजा की थाल सजाए, आकर्षक सुंदर पुष्पहार, राग-भोग लिए बाबा के दर्शन-पूजन को आतुर दिखे। दूर से ही रथ पर बाबा की झलक देख निहाल हुए। महिलाएं छतों, बरामदों से फूलों की वर्षा कर परिवार में सुख-समृद्धि की कामना कर रही थीं।
दरवाजे पर हर कोई सकुटुंब बाबा श्री की आरती उतार उनके मनोहारी दर्शन का पुण्य लाभ अर्जित कर रहे थे। भक्तों के जनसैलाब से रथ का पहिया भी मंद पड़ गया। तीन किमी के बरात मार्ग को पारकर मंदिर पहुंचने में करीब 10 घंटे लग गए। बरात जलालीपुरा होते हुए कज्जाकपुरा स्थित कपाल मोचन कुंड पहुंची।
नगर वधुओं ने बाबा के चरणों में अपनी मनमोहक प्रस्तुति से हाजिरी लगाई। बरात में समिति के उपाध्यक्ष बसंत सिंह राठौर, प्रधानमंत्री मुन्ना लाल यादव, कोषाध्यक्ष छोटन केशरी, नंदलाल प्रजापति, बच्चे लाल बिंद, शिवम अग्रहरि, निक्की जायसवाल, सुशील जायसवाल, हिमांशु अग्रहरि, आशीष कुशवाहा, महेंद्र जायसवाल, नवीन, सचिन, अरविंद आदि शामिल रहे। रविवार को शाम छह बजे से भंडारा होगा।
महिलाओं ने किया बाबा का परछन, निभाई गई विवाह की रस्में
कुंड पर बरात के शुभागमन होते ही वैवाहिक उमंग कई गुना बढ़ गया। मुख्यद्वार पर लगाए गए केले के खंभे, पूराए गए चौक, माड़ो, कोहबर सहित अन्य मांगलिक चिह्न अपने आराध्य के पावन स्पर्श के निमित्त प्रतीक्षारत थे। महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं। वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य द्वार पूजन, परछन के साथ ही अन्य वैवाहिक संस्कार के सभी विधान शास्त्रोक्त विधि से हुए। भैरवी कूप की पांच परिक्रमा के बाद रजत मुखौटे को विग्रह पर धारण कराया गया। विवाह संपन्न होने के बाद आरती उतारी गई। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।