बड़ों से मिले संस्कार को आत्मसात कर अपनी पहचान बनाई। कठिनाइयों के बीच रहकर संघर्ष किया। पौराणिक गाथाओं से सीख लेते हुए देश और समाज सेवा का व्रत लिया। उन्होंने प्रदेश में लोक निर्माण मंत्री के कार्यकाल के दौरान बनाए गए महत्वपूर्ण पुलों एवं सड़कों का भी उल्लेख कर पूर्वांचल के विकास में अपने योगदान की चर्चा की। आयोजकों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयास के चलते ही आज उन्हें अपनी धरती के लोगों को प्रणाम करने का मौका मिला है।