जिले में 12 से 25 जुलाई तक चलनेे वाले दस्तक अभियान में घर-घर कालाजार के मरीजों की तलाश की जाएगी। साथ ही लोगों को कालाजार के कारण और बचाव के उपाय भी बताए जाएंगे। मंगलवार को राज्यस्तरीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला में तैयारियों की समीक्षा की गई। मलेरिया एवं वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी और अपर निदेशक डॉ. बिंदु प्रकाश सिंह ने बताया कि दो हफ्ते से ज्यादा बुखार वाले कालाजार के संभावित मरीजों की जांच अवश्य कराई जाए। आशा कार्यकर्ता को बुखार के रोगी को ही चिह्नित करना है। जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडेय ने बताया कि अब तक दस्तक अभियान में कोविड, जेई, टीबी रोगियों, कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने का निर्देश था लेकिन अब कालाजार के मरीजों को भी खोजा जाएगा।
2018 में मिले थे तीन मरीज
2018 में काशी विद्यापीठ के हरपालपुर गांव में दो और सेवापुरी के अर्जुनपुर गांव में कालाजार का एक मरीज मिला। कालाजार प्रभावित गांवों में दवा का छिड़काव कराया गया। अब अभियान में ऐसे मरीजों को खोजा जाएगा। जिले में दीनदयाल अस्पताल, बीएचयू के साथ ही सभी ब्लॉक स्तरीय पीएचसी/सीएचसी पर निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है।
फाइलेरिया रोधी अभियान भी चलेगा
जिले में 12 से 26 जुलाई तक फाइलेरिया रोधी अभियान भी चलाया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा खिलाएंगे। मंगलवार को शहरी पीएचसी दुर्गाकुंड, आनंदमयी, बेनिया की टीम को प्रशिक्षित किया गया। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुपरवाइजर और दवा वितरक को ‘दस का दम’ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फाइलेरिया क्या है, लक्षण, बचाव, किन्हें दवा खिलाई जानी है, दवा का प्रभाव आदि के बारे में बताया जा रहा है।