नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने बीएचयू में कहा कि देश में महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है। यहां बेटियों को जानवरों से भी कम दाम में बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के कई गांवों में दो लाख रुपये की भैंस बिक रही है और लड़कियां 50 हजार में बेची जा रही हैं। इनसे घरेलू नौकर और वेश्यावृत्ति जैसे काम कराए जा रहे हैं।
बुधवार को स्वतंत्रता भवन में ‘सुरक्षित बचपन सुरक्षित भारत’ विषय पर आयोजित शताब्दी व्याख्यान में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि हमारा बचपन सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज हम दुनिया के सबसे तेजी से तरक्की करने वाले देश हैं। महान परंपरा वाले देश के वासी हैं लेकिन आज हमारी बेटियां और बेटे सुरक्षित नहीं। दुर्गा, लक्ष्मी के इस देश में बेटियां जानवरों से भी कम कीमत पर बेचीं जा रही हैं।
आपको ये बात कचोटनी चाहिए। आपको आजादी की संस्कृति में जीना है या डर की संस्कृति ये आपको तय करना है।
आज आप काशी की धरती से संकल्प लें कि गुलामी और वेश्यावृत्ति की बेड़ियों में जकड़े बेटे बेटियों को आजादी दिलाकर भारत को फिर से जगद्गुरु का दर्जा दिलाएंगे।
वैश्वीकरण का दर्शन पश्चिम से पूरब की तरफ चला लेकिन अब मौका आया है कि पूरब से वैश्वीकरण हो और वो वैश्वीकरण हो करुणा का। उनकी पत्नी सुमेधा सत्यार्थी भी मंच पर मौजूद रहीं। कैलाश सत्यार्थी का शताब्दी व्याख्यान सुनने सेंट्रल हिंदू गर्ल्स और ब्वॉयज स्कूल के बच्चे भी आए थे।
बच्चों और बचपन के लिए काम करने वाले को अपने बीच पाकर ये स्कूली बच्चे खासा उत्साहित थे।
जब एक दफा उन्होंने भाषण खत्म करना चाहा तो बच्चे उनसे और सुनने को अड़ गए। उनकी कही बातों से इतना प्रेरित हुए कि बच्चों ने न सिर्फ उन्हें अपना रोल मॉडल बना लिया, बल्कि उनके अभियान से जुड़ने का मन बना लिया।