महोत्सव में प्रवचन सुनती महिलाए
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कराची, पाकिस्तान से आए प्रकाशदास ने बताया कि वह हर साल यहां आते हैं और जन्मस्थली की धूल को सिर-माथे लगाते हैं। परिवार में मां, दया बाई, भाई मनीलाल, पत्नी संगीता दास के अलावा अपनी बेटियां रौनिक और मोनिका के साथ आए हैं।
उन्होंने बताया कि देश के बंटवारे के पहले से ही हम लोगों के दादा जी कराची में बस गए थे, तब से हम लोग वहीं रह रहे हैं। वेस्टइंडीज से आए सुरेश और अंकित दास ने बताया कि हम लोग नौंवी बार काशी आए हैं।
हम दोनों हिंदी नहीं समझ पाते हैं, लेकिन कबीर के भजन और प्रवचन याद हैं। हम पिछले कई पीढ़ियों से संत कबीर को मान रहे हैं। ऐसे में जब समय मिलता है तो काशी दर्शन करने के लिए आते हैं।
प्रवचन में हुजूर अर्द्धनाम साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब ने देश-दुनिया को सत्य लोक की राह दिखाई। सद्गुरु साहेब के संदेशों को आत्मसात कर यह लोक और परलोक दोनों सुधारा जा सकता है।
सद्गुरु साहेब के बताए भक्ति के साधनों का प्रयोग करके आप सत्य लोक के निवासी बन सकते हैं। मनुष्य का जीवन मिलना कठिन है, दुर्लभ है, लेकिन उससे भी अधिक दुर्लभ है सच्चे सद्गुरु का मिलना।