ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को स्नान दान तथा व्रत के सर्वोत्तम माना जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 24 जून को संत कबीर दास का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा और भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा भी सांकेतिक रूप में आयोजित कराई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को बिल्वरात्रि व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार सनातन धर्म में हिंदी के 12 महीनों का अपना अलग-अलग महत्व है। जिसमें 12 महीनों की पूर्णिमाओं का विशेष स्थान होता है। इसमें जेष्ठ पूर्णिमा का विशेष स्थान माना गया है। कारण की भगवान चातुर्मास में शयन के लिए चले जाते हैं। देखा जाए तो चातुर्मास से पूर्व पड़ने वाला जेष्ठ पूर्णिमा व चातुर्मास के बाद पड़ने वाली कार्तिक पूर्णिमा का अपना एक विशिष्ट महत्व होता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा को ही देव स्नान पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ को विधिवत स्नान कराया जाता है। सनातन धर्म में इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ पूर्णिमा 24 जून को रात्रि 11:59 बजे तक रहेगी। इस दिन गंगा स्नान के साथ दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु का पूजन करके दान करने से अमोघ पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से लोगों को वैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है।