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बीएचयू अस्पतालः आधी रात में हड़ताल पर लगा ब्रेक, काम पर लौटे जूनियर डॉक्टर

Thu, 18 May 2017 11:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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हड़ताल के कारण मरीज बेहाल - फोटो : अमर उजाला
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जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल दो दिन बाद बुधवार की रात 12 बजे सुरक्षा का आश्वासन मिलन के बाद खत्म हो गई। जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। इसी के साथ चिकित्सकीय सेवाएं भी सामान्य हो गई हैं।
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देर रात कुलपति डॉ. जीसी त्रिपाठी, आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला, रजिस्ट्रार डॉ. नीरज त्रिपाठी, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय के साथ हुई वार्ता के बाद हड़ताल खत्म हुई।

इससे पहले हड़ताल की वजह से बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं चरमराने से मरीज दिन भर बेहाल रहे। 
इमरजेंसी, आईसीयू को छोड़कर ओपीडी सहित अन्य विभागों में चिकित्सा सेवाएं ठप रहीं। जूनियर डॉक्टरों ने ट्रॉमा सेंटर में भी सेवाएं नहीं दीं। इससे वहां भी चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुईं।
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यूपी, बिहार, नेपाल समेत अन्य जगहों से आए मरीज और उनके परिजन अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे। कई मरीज ओपीडी के बाहर बैठे थे। दोपहर में जूनियर डॉक्टरों से वार्ता के लिए एडीएम सिटी जितेंद्र मोहन, एसपी सिटी डॉ.राजेश यादव पहुंचे।

उन्होंने चीफ प्राक्टर, चिकित्सा अधीक्षक की मौजूदगी में जूनियर डॉक्टरों को कार्रवाई का डॉक्टरों संग बैठकर जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया लेकिन बात नहीं बनी। जूनियर डॉक्टरों का कहना था कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही काम पर लौटेंगे।

अमानवीय और अनैतिक है हड़ताल
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को अमानवीय और अनैतिक बताते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने देर शाम एक अपील जारी कर उनसे काम पर वापस लौटने को कहा।

उन्होंने सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. मुमताज अंसारी के साथ मारपीट की घटना की निंदा की। साथ ही, अब तक मामले में हुई पुलिस कार्रवाई और विश्वविद्यालय स्तर से आरोपियों पर कार्रवाई के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराया।
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ओपीडी हाल में कुर्सियां रहीं खाली, इमरजेंसी में सन्नाटा

आधे से अधिक कुर्सियां खाली - फोटो : अमर उजाला
आम दिनों में जहां ओपीडी बिल्डिंग में डॉक्टर का इंतजार करने के लिए हाल में लगी कुर्सियां खचाखच भरी रहती हैं वहीं बुधवार को यहां आधे से अधिक कुर्सियां खाली रहीं। दूरदराज से आए मरीज इस इंतजार में बैठे थे कि शायद दो-चार घंटे में हड़ताल समाप्त हो जाए। जबकि, बाकी मरीजों में कई बिना इलाज के लौट गए तो कई मरीजों ने मंडलीय या फिर निजी अस्पतालों की शरण ली।

सुरक्षा में लगे सीआईएसएफ तब बनेगी बात
अस्पताल में आए दिन तोड़फोड़, चिकित्सकों के साथ मारपीट की घटना के बाद सुरक्षा का मुद्दा और गरमा गया है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय का कहना था कि अस्पताल परिसर में सीआईएसएफ की तैनाती होनी चाहिए। बताया कि इसके लिए कुलपति की ओर से गृह मंत्रालय को पत्र भेजा जा चुका है, साथ ही गृहमंत्री से भी बात की गई है। हालांकि मंत्रालय से अब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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