आजमगढ़। पंजीकरण, बीमा, साइलेंसर नहीं है। प्रदूषण का प्रमाण भी नहीं। सड़क पर न तो कोई इन्हें रोकता है और न ही चेक करता है। सिस्टम पर भारी जुगाड़ वाहन शहर में फर्राटा भर नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हर चौराहे पर मुस्तैद होने का दावा करने वाली यातायात पुलिस व सिविल पुलिस इन वाहनों को देखकर मुंह फेर लेती है। आए दिन यह वाहन कहीं न कहीं कभी खराब होने पर पलटते हैं जिससे दुर्घटना होती है।
नियमानुसार कंपनी ये मिलने वाले वाहन को मॉडिफाई कराकर दूसरी शक्ल देना गलत है। इसके बाद भी जनपद में यह कार्य तेजी से फल फूल रहा है। कोई बाइक में साइकिल का चक्का लगाकर वाहन ढ़ाेने का काम कर रहा है तो कोई मैजिक को चलती फिरती दुकान बनाकर घूम रहा है। इतना ही नहीं कुछ लोग तो इंजन लगाकर ठेले को दूसरे रूप में तैयार कर उस पर अपनी दुकान चलाते हैं। कोई गन्ने का जूस निकाल रहा है तो कोई उस पर सामान ढो रहा है। यह कार्य यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की आंखों के सामने हो रहा है। सबकुछ जानते हुए भी जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं। जबकि अक्सर ऐसे वाहनों से दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
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केस एक
मंगलवार को नरौली तिराहे पर बीच सड़क पर ही एक ऐसे ही ओवरलोड जुगाड़ वाहन का अचानक धुर्रा टूट गया। जिससे ठेले का पहिया निकल गया और वह लुढ़कते हुए सड़क किनारे जा पहुंचा और जुगाड़ वाहन पलट गया। इस दुर्घटना में जुगाड़ वाहन चला रहा चालक भी बाल-बाल बच गया। वहीं आगे व पीछे से आ रहे वाहन भी इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रुक गए। संयोग ठीक रहा कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ नहीं तो कइयों की जान चली जाती।
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केस दो
ऐसा ही एक मामला बरसात के मौसम में एसपी आफिस के पास हुआ था। जब कलेक्ट्रेट की ओर से एक ओवरलोड जुगाड़ वाहन भारी भरकम सामान लेकर जा रहा था। जैसे ही वह कलेक्ट्रेट की ओर से एसपी आफिस की ओर मुड़ा उसके जुगाड़ वाहन का चक्का निकल गया। यह जुगाड़ वाहन मोटर साइकिल पर ठेले के पहिए को जोड़कर बनाया गया था। चक्का निकलते ही गाड़ी वहीं पलट गई। इसी बीच सामने से आ रहा एक स्कूटी सवार ने अचानक ब्रेक लगाया जिसके कारण वह बच गया अन्यथा ठेले पर रखा पूरा सामान उसके ऊपर गिरता।
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कंपनी की तरफ से जो वाहन दिया जाता है उसे मॉडिफाई कराकर दूसरा रूप देना गलत है। इसके खिलाफ जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। ताकि इस पर लगाम लगाई जा सके।
सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ, प्रशासन।