काशी में संतान के दीर्घायु जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना के साथ महिलाएं जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) का व्रत रखेंगी। इसके साथ ही लक्सा स्थित प्राचीन लक्ष्मी कुंड पर चल रहे 16 दिवसीय पारंपरिक सोरहिया मेले का शनिवार को विधिवत समापन होगा।
बृहस्पतिवार को मां लक्ष्मी के दर्शन के लिए महिलाओं की लाइन लगी रही। जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर काशी के प्रमुख गंगा घाटों, अस्सी, दशाश्वमेध, पंचगंगा, ईश्वरगंगी, बरेका सूर्य सरोवा सहित विभिन्न कुंडों व सरोवरों पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। माताएं 24 घंटे का निर्जला उपवास रखकर जीमूतवाहन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। व्रती महिलाएं सुबह पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान कर संतान रक्षा का संकल्प लेंगी और कथा श्रवण के उपरांत बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल और अक्षत अर्पित करेंगी।