बीएचयू से प्रकाशित विश्व पंचांग में जीवित्पुत्रिका का व्रत सात अक्तूबर को मान्य किया गया है। इसके लिए उन्होंने राजा मार्तंड के भृगु वचन का उल्लेख किया है।
जीवित्पुत्रिका पर्व पर पूजन करतीं महिलाएं।
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गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीप कर स्वच्छ कर दें। छोटा-सा तालाब भी जमीन खोदकर बना लें। तालाब के निकट एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर दें। शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति जल (या मिट्टी) के पात्र में स्थापित कर पीली और लाल रूई से अलंकृत करें तथा धूप, दीप, अक्षत, फूल माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों से पूजन करें।
मिट्टी तथा गाय के गोबर से चिल्ली या चिल्होड़िन (मादा चील) और सियारिन की मूर्ति बनाकर उनके मस्तकों को लाल सिंदूर से भूषित कर दें। अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए उपवास कर बांस के पत्रों से पूजन करना चाहिए। इसेक बाद व्रत माहात्म्य की कथा का श्रवण करना चाहिए