श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस व्रत को खर जिउतिया भी कहते हैं। क्योंकि इसमें दिनभर निराजल व्रत रखा जाता है। इस बार अष्टमी तिथि तीन अक्तूबर को सुबह 9:53 से अगले दिन सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी और अगले दिन सुबह 5:50 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। इस तरह से नवमी तिथि का क्षय रहेगा।
तीन अक्तूबर को अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन है। अष्टमी तिथि तीन को लगने के साथ ही जिउतिया व्रत रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिन महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को कुंडों, तालाबों, घाटों और मंदिरों पर विविध नैवेद्य के साथ जिउतिया माता का पूजन करेंगी। रात्रि जागरण कर कथा का श्रवण और मंगल गीत गाएंगी।
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि व्रत की शुरुआत दो अक्तूबर को नहाय-खाय से होगी। इस दिन महिलाएं स्नान, शुद्धि और सात्विक भोजन के साथ व्रत का संकल्प लेंगी। लोकमान्यता के अनुसार कुछ महिलाएं भोर में सरगी ग्रहण करती हैं। तीन अक्तूबर को निराजल व्रत रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में पूजन अर्चन करेंगी। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि तीन अक्तूबर की सुबह शुरू होगी और चार अक्तूबर को सुबह 07:28 बजे से पारण होगा।