वाराणसी। विकास कार्यो में मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप के चलते शुक्रवार को जिला पंचायत की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। सपा समेत अन्य दलों से जुड़े जिला पंचायत सदस्यों ने पूर्व में टेंडर जारी होने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने को लेकर आपत्ति जताई। बैठक में करीब 25 सदस्यों के अनुपस्थित होने के कारण कोरम का अभाव बताया गया। 45 मिनट तक चले आरोप-प्रत्यारोप के बाद बैठक को स्थगित कर दिया गया। एक फरवरी को पहले जारी हुए टेंडर के काम की शुरुआत के आश्वासन पर दो फरवरी को बैठक नियत की गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर की अध्यक्षता में शुक्रवार की दोपहर बैठक शुरू हुई। इसमें जैसे ही नए कार्यों को लेकर प्रस्ताव लाया गया, सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। कहा कि नए प्रस्ताव लाने का कोई मतलब नहीं है। पहले पुराने कार्यों को पूर्ण कराया जाए जिनके टेंडर हो चुके हैं। सदस्यों का आरोप था कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे, उनकी जांच नहीं हुई, काम के बंटवारे को लेकर भी पक्षपात किया गया है। जिला पंचायत अधिकारी अधिकारी ने बैठक में बताया कि अपर मुख्य अधिकारी का स्वास्थ्य खराब था और इंजीनियर का पद खाली होने के कारण काम नहीं हो पाए। बैठक में तय हुआ कि पूर्व में जो टेंडर जारी हुए थे, सभी जिला पंचायत सदस्यों के इलाके में एक-एक काम की शुरुआत की जाए। जिला पंचायत सदस्यों ने इस प्रस्ताव को मान लिया। इसके बाद दो फरवरी को बैठक तय की गई है।
दो फरवरी की बैठक में संशय
जिला पंचायत सदस्यों का कहना है कि दो फरवरी को भी बैठक विधि संगत नहीं है। बैठक स्थगित होने के बाद एक सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए। पिछली बार मार्च 2019 में बैठक हुई थी और इसके बाद बैठक नहीं बुलाई गई। इस मामले को लेकर सदस्य लामबंद होने लगे हैं।