जेएचवी मॉल में 31 अक्तूबर को अंधाधुंध फायरिंग
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वाराणसी के छावनी क्षेत्र स्थित जेएचवी मॉल में 31 अक्तूबर को अंधाधुंध फायरिंग कर दो लोगों की हत्या और दो की हत्या के प्रयास करने के चार आरोपियों को जेल भेज कर पुलिस शांत बैठ गई है। पुलिस का यह ढुलमुल रवैया तब है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह ने इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
मॉल में फायरिंग के मुख्य आरोपी आलोक उपाध्याय की प्रेमिका की भूमिका कैंट पुलिस 27 दिन बाद भी नहीं तय कर सकी है। आलोक के पिता अवधेश उपाध्याय के खिलाफ दर्ज दो मुकदमों की जांच भी ठप पड़ी हुई है। वहीं, पुलिस की ओर से मॉल प्रबंधक गौरव जायसवाल और हॉक्स सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मियों के खिलाफ कैंट थाने में दर्ज किए गए मुकदमे की तफ्तीश भी कैंट थाने में जहां की तहां अटकी है।
31 अक्तूबर की दोपहर बाद जेएचवी मॉल में फायरिंग कर यहां के शोरूम में काम करने वाले गोपी कन्नौजिया और सुनील कुमार गौड़ की हत्या कर दी गई थी। वहीं, विशाल सिंह और चंदन शर्मा घायल हुए थे। मामले में मुख्य आरोपी आलोक सिंह, रोहित सिंह और ऋषभ सिंह को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुंदन गुप्ता बिहार पुलिस के हत्थे चढ़ा।
पुलिस के अनुसार मॉल स्थित प्यूमा शोरूम में आलोक की प्रेमिका की छोटी बहन काम करती थी। आलोक की प्रेमिका की छोटी बहन को प्यूमा शोरूम में काम करने वाला प्रशांत परेशान करता था। प्रेमिका के कहने पर आलोक अपने तीन दोस्तों के साथ देसी पिस्टल से लैस होकर प्रशांत को खोजते हुए मॉल पहुंचा और फायरिंग हुई।