भगवान झूलेलाल का 40 दिवसीय उत्सव 'चालिया' शहर में श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। सिंधी समाज के लोगों ने भगवान झूलेलाल की आरती उतारकर पूजा अर्चना की। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार झूलेलाल उत्सव श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव के साथ घरों में मनाया।
हर साल 16 जुलाई से 25 अगस्त तक आयोजित होने वाले झूलेलाल चालिया महोत्सव के दौरान झूलेलाल मंदिर में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता था। लेकिन इस बार ना तो मंदिर पर भक्तों की भीड़ एकत्रित रही और ना ही पहले जैसा उत्साह देखा गया। हर साल निकलने वाली प्रभात फेरी भी इस बार नहीं निकाली गई।
16 अगस्त से 24 अगस्त तक चलने वाले अंतिम नौरेजा के दौरान घर के मंदिर की विशेष सजावट कर पूजा अर्चना की गई। सिद्धगिरीबाग निवासी रौशनी हिरानी बताती है कि चालिया उत्सव में 40 दिनों तक भक्त उपवास रखते हैं। उपवास के दौरान 40 दिनों तक लोग दाढ़ी और बाल नही बनाते। चालिया पर्व के उपवास में सादा और सात्विक भोजन किया जाता है, कुछ लोग एक समय भोजन करते है, तो कहीं समय भोजन किया जाता है।
ऊर्जा लेडीज विंग की पूर्व अध्यक्ष हर्षा बताती हैं चालिया सिंधी प्रदेश की पुरानी परंपरा है। जिस समाज पूरी आस्था और विश्वास के साथ करता है। ऐसी मान्यता है कि सिंध प्रदेश में अत्याचारी बादशाह मिरख शाह के आतंक से तंग आकर लोगों ने बड़ी संख्या में सिंधु नदी के तट पर बैठकर जलावतर की आराधना की। 40 वें दिन प्रभु झूलेलाल प्रकट हुए और कहा कि शीघ्र ही अत्याचारी बादशाह के आतंक का अंत होगा। जिसके बाद उस बादशाह का अंत हुआ और तभी से सिंधी समाज चालिया महोत्सव मनाता है। हर्षा ने बताया कि शीघ्र ही प्रदेश की राज्यपाल से उत्तर प्रदेश सिंधी युवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश ओमी की अगुवाई में वाराणसी, लखनऊ व अयोध्या का 11 सदस्यीय एक प्रतिनिधि मंडल मिलकर प्रभु झूलेलाल की जीवनी को सरकारी पाठ्य पुस्तक में शामिल करने के लिए एक प्रस्ताव सौंपेगा।