12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया। इसके बाद 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की। इसी रात देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। जेपी समेत विपक्ष के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। आपातकाल के दौर में भी वे लोकतंत्र की बहाली के संघर्ष का प्रमुख चेहरा बने रहे।
वर्ष 1977 में जेपी ने विपक्षी दलों को एकजुट कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोरारजी देसाई के नेतृत्व में केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। खास बात यह रही कि सत्ता परिवर्तन में निर्णायक भूमिका निभाने के बावजूद जेपी ने स्वयं कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं किया। उनका विश्वास सत्ता से अधिक समाज की जागरूकता और जनभागीदारी में था।
खेतों और रेस्तरां में काम कर जुटाया पढ़ाई का खर्च
जेपी का जीवन शुरुआती दौर से ही संघर्षों से भरा रहा। उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए तो पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियों और रेस्तरां में काम किया। इसी दौरान वे समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए। स्वदेश लौटने के बाद स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आठ अक्तूबर 1979 को जेपी ने अंतिम सांस ली।
वर्ष 1998 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका जीवन आज भी युवाओं को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और जनहित में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।
उनकी पुण्यतिथि पर देश उनके विचारों और लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्ष को याद करता है, लेकिन उनके पैतृक गांव जयप्रकाश नगर की स्थिति भी इस अवसर पर चर्चा का विषय बनती है। जेपी की स्मृतियों से जुड़े स्थल और विरासत देश की लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में गांव के विकास, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
आज जेपी ट्रस्ट परिसर में मनेगी पुण्यतिथि
जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान के व्यवस्थापक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि आठ अक्तूबर को उनके पैतृक गांव जयप्रकाश नगर स्थित जेपी ट्रस्ट परिसर में प्रतिवर्ष की भांति मनाई जाएगी। कार्यक्रम में जेपी के जीवन, विचारों और लोकतंत्र के लिए उनके संघर्ष को याद किया जाएगा।