फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जयप्रकाश नारायण: सत्ता से टकराकर लोकतंत्र की रक्षा की, संपूर्ण क्रांति से बदल दी देश की राजनीति; सवाल हैं कायम

Thu, 08 Oct 2026 05:54 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सत्ता से टकराकर लोकतंत्र की रक्षा का संदेश दिया और संपूर्ण क्रांति के आंदोलन से देश की राजनीति की दिशा बदल दी। उनके आंदोलन ने व्यवस्था परिवर्तन की अलख जगाई। हालांकि, जेपी के पैतृक गांव के विकास और उनकी विरासत के संरक्षण का सवाल आज भी कायम है। उनकी स्मृतियों को संजोने की जरूरत है।
विज्ञापन
लोकनायक जयप्रकाश नारायण। - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जीवन संघर्ष, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की मिसाल है। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश, समाज और आमजन के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। आठ अक्तूबर को उनकी पुण्यतिथि पर देश उनके विचारों, आंदोलनों और योगदान को याद करेगा। वहीं, उनके पैतृक गांव जयप्रकाश नगर के विकास, बुनियादी सुविधाओं और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का सवाल आज भी प्रासंगिक है।

विज्ञापन


वर्ष 1974 में बिहार से शुरू हुए छात्र आंदोलन को जेपी ने व्यापक जनांदोलन का रूप दिया। पांच जून 1974 को पटना के गांधी मैदान से उन्होंने ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया। उनका लक्ष्य महज सरकार बदलना नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाना था। उन्होंने युवाओं और आमजन को लोकतांत्रिक तरीके से व्यवस्था परिवर्तन के लिए आगे आने का आह्वान किया। 

Trending Videos

12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया। इसके बाद 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की। इसी रात देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। जेपी समेत विपक्ष के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। आपातकाल के दौर में भी वे लोकतंत्र की बहाली के संघर्ष का प्रमुख चेहरा बने रहे।

वर्ष 1977 में जेपी ने विपक्षी दलों को एकजुट कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोरारजी देसाई के नेतृत्व में केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। खास बात यह रही कि सत्ता परिवर्तन में निर्णायक भूमिका निभाने के बावजूद जेपी ने स्वयं कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं किया। उनका विश्वास सत्ता से अधिक समाज की जागरूकता और जनभागीदारी में था।

खेतों और रेस्तरां में काम कर जुटाया पढ़ाई का खर्च
जेपी का जीवन शुरुआती दौर से ही संघर्षों से भरा रहा। उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए तो पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियों और रेस्तरां में काम किया। इसी दौरान वे समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए। स्वदेश लौटने के बाद स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आठ अक्तूबर 1979 को जेपी ने अंतिम सांस ली। 

वर्ष 1998 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका जीवन आज भी युवाओं को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और जनहित में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है। 

उनकी पुण्यतिथि पर देश उनके विचारों और लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्ष को याद करता है, लेकिन उनके पैतृक गांव जयप्रकाश नगर की स्थिति भी इस अवसर पर चर्चा का विषय बनती है। जेपी की स्मृतियों से जुड़े स्थल और विरासत देश की लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में गांव के विकास, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
विज्ञापन

आज जेपी ट्रस्ट परिसर में मनेगी पुण्यतिथि
जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान के व्यवस्थापक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि आठ अक्तूबर को उनके पैतृक गांव जयप्रकाश नगर स्थित जेपी ट्रस्ट परिसर में प्रतिवर्ष की भांति मनाई जाएगी। कार्यक्रम में जेपी के जीवन, विचारों और लोकतंत्र के लिए उनके संघर्ष को याद किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें