सीने में फख्र और आंखें आंसुओं से तरबतर। गम और गुस्से के साथ लोगों ने शहीद पारसनाथ को अंतिम विदाई दी। रविवार की देर रात गोमती नदी के रामघाट पर शहीद के शव का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जौनपुर के दुदौली गांव में शहीद पारसनाथ के अंतिम दर्शन के लिए रविवार की सुबह सात बजे से ही लोग टकटकी लगाये थे। हर कोई हकीकत से रूबरू होते हुए भी होठों को सीकर आंखों में आंसुओं को सम्हाले था । रविवार की रात करीब सवा 12 बजे सुकमा नक्सली प्रेशर बम ब्लास्ट में शहीद हुए पारसनाथ का तिरंगे में लिपटा हुआ शव लेकर सीआरपीएफ़ इलाहाबाद के डीआईजी डीके त्रिपाठी , जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना, एसडीएम सदर राकेश पटेल, सीओ सदर आरपी यादव दुदौली गांव पहुंचे तो लोगों के सब्र का बांध टूट गया ।
शहीद के शव के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लग गई। महिला, पुरुष, बूढ़े, बच्चे हर कोई अपने माटी के लाल को भर नजर देखना चाहता था। जब तक सूरज चांद रहेगा, पारस तेरा नाम रहेगा के जय घोष के साथ लोग दुश्मन के कायराना हरकत की निंदा भी कर रहे थे।
शहीद के पिता भूसी राम व उसकी पत्नी प्रीति किरण को ढांढस भी बंधा रहे थे।
शव के करीब बैठी पत्नी का विलाप देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। माता इनर देवी के करुण क्रंदन ने सभी को झकझोर दिया। पांच वर्षीय बेटा कौशल पिता की अर्थी से लिपट कर रोता रहा। पुष्पांजलि देने के बाद सीआरपीएफ के अधिकारियों व सिपाहियों ने कंधा दिया।
घर से लगभग एक किलो मीटर तक सैकड़ों की संख्या में लोग शव के साथ पैदल आये ।
बाद में फोर्स की गाड़ी से शव रामघाट ले जाया गया जहां देर रात लगभग दो बजे शहीद को अंतिम सलामी देकर अधिकारियों ने शव पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहीद के पिता भूसी राम ने कलेजे पर पत्थर रखकर मुखाग्नि दी ।