ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की पहल पर जायका ने इन गांवों की सफाई व्यवस्था का जिम्मा उठाने की सहमति दी है। फिलहाल 15 अप्रैल तक एजेंसी कंचनपुर गांव की निगरानी करेगी और वहां सर्वे के माध्यम से यह पड़ताल करेगी कि निकलने वाले ठोस अपशिष्ट का निस्तारण वर्तमान में कैसे किया जा रहा है।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि जायका प्रबंधन के साथ बैठक में यह निर्णय लिया गया है। कंचनपुर में प्रयोग सफल रहा तो शहरी सीमा में शामिल सभी गांवों में यह एजेंसी काम करेगी।
सारनाथ के समग्र विकास के लिए लागू प्रो पुअर योजना में मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल की सख्ती के बाद नगर निगम, जल निगम, लोक निर्माण विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। हालांकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इकाई (एएसआई) की ओर से एनओसी नहीं जारी की गई है। हालांकि स्थानीय एजेंसियों की एनओसी के बाद एएसआई के संरक्षण से अलग इलाकों में काम शुरू कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। उधर, एएसआई से अनापत्ति प्राप्त करने के लिए वीडीए अधिकारियों ने पत्राचार शुरू किया है।