वाराणसी। कोरोना काल में भी कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार लोग उत्साह के साथ मना रहे हैं। हालाकी मंदिरों और मठों में लगने वाली झांकी इस बार नहीं थी तो सड़को पर शाम पांच के बाद रौनक नहीं दिखी। लेकिन घरों में कान्हा के जन्म पर बधाइयां गूंजी। कहीं ढोलक की थाप और कहीं मंजीरे पर सोहर गाए जा रहे थे। तो कुछ घरों में सुबह से ही भजन कीर्तन का आयोजन किया गया था। बात जब अपने लड्डू गोपाल ठाकुर जी और राधा रानी को सजाने की हो तो कोई भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता। शहर के विभिन्न घरों में महिलाओं ने स्नान कर अपने कान्हा को नया वस्त्र पहनाया, उनको मुरली, मोर मुकुट, हाथों में चूड़ीला तो पहनाया ही साथ ही गले में माला पहनकर उनका श्रृंगार किया। घरों में बच्चों ने भी अपने कृष्ण के स्वागत के लिए झांकी सजाई। केले के पत्तों से मंडप बनाया गया फिर उस पर अशोक की पत्ती और गेंदे के फूलों से सजावट की गई। यह सब देख कर किसी उत्सव से कम नहीं लग रहा था। कई घरों में तो बच्चों ने अपने हाथों से लड्डू गोपाल के लिए पालना और झूला भी तैयार किया।
कान्हा संग सजे ठाकुर जी और राधा रानी-
कबीर नगर निवासी आभा भुवालका बताते हैं सुबह सबसे पहले पूजा करने के साथ ही लड्डू गोपाल के संग ठाकुर जी और राधा रानी को नए वस्त्रों आभूषणों से उनका श्रृंगार किया। कृष्ण को माखन मिश्री बहुत पसंद है तो उनको माखन मिश्री का भोग लगाया। इसके बाद शाम को भजन कीर्तन हुआ। रात में जन्म के बाद पूरे परिवार ने लड्डू गोपाल को झूला झुलाया।
डिजिटल हुए कान्हा-
पहाड़िया निवासी रीता जायसवाल बताती है हर साल जय श्रीकृष्ण संस्था के सभी मेंबर्स धूमधाम से कृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियां मानते थे। इस बार कोरोना के कारण हम सब ने अपने अपने घरों में कान्हा को सजाया और उनको जन्मदिन मनाया। कोरोना कॉल में डिजिटल मंच पर सभी अपने कान्हा के संग लाइव हुए। जूम और गूगल मीट पर भजन कीर्तन किया गया।