शिक्षकों का कहना है कि आमतौर पर लोगों को सिर्फ इतना पता है कि भवनों की गणना की जा रही है। उन्हें यह जानकारी नहीं है कि गणना करने आने वाला कर्मचारी सॉफ्टवेयर में दर्ज 33 सवाल पूछेगा। जानकारी के अभाव में लोग सवाल कर रहे हैं कि जब भवन की गणना हो रही है तो अनाज, शौचालय, टीवी और मोबाइल की जानकारी क्यों मांगी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि जनगणना को लेकर और अधिक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।
बिना जानकारी के बढ़ाया जा रहा एचएलबी
शिक्षकों ने बताया कि बिना किसी कर्मचारी को जानकारी दिए उसका एचएलबी (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक) बढ़ा दिया जा रहा है। कर्मचारियों को इसकी जानकारी तब मिलती है जब उनके मोबाइल पर संदेश आता है। इससे काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
शिक्षक नेताओं की नहीं लगी ड्यूटी, कुछ ने बाद में कटवाई
ड्यूटी कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि जनगणना ड्यूटी लगाने में पक्षपात किया गया है। उनका कहना है कि शिक्षक नेताओं को इस काम से दूर रखा गया, जबकि नियमानुसार सभी की ड्यूटी लगनी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों ने पैरवी कर अपना नाम ड्यूटी से हटवा लिया। इसका असर दूसरे कर्मचारियों के एचएलबी बढ़ने के रूप में पड़ रहा है।
अर्जित अवकाश की उठी मांग
शिक्षकों ने जनगणना ड्यूटी के बदले अर्जित अवकाश देने की मांग की है। उनका कहना है कि गर्मी की छुट्टियों में ही शिक्षकों को अपने निजी काम या परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है, लेकिन जनगणना के कारण उन्हें अवकाश नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने दिल्ली और मध्यप्रदेश की तर्ज पर यहां भी अर्जित अवकाश दिए जाने की मांग की है।