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जनगणना 2026: कार, किरायेदार, एसी का विवरण देने में कतरा रहे लोग, शिक्षकों से कर रहे अटपटे सवाल

Fri, 29 May 2026 10:39 AM IST
Pragati Chand अभिषेक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: जनगणना के दौरान लोग शिक्षकों से अटपटे सवाल कर रहे  हैं। वे संपत्ति की जानकारी के बाद टैक्स बढ़ने को लेकर संशय में हैं। साथ ही लोग कार, किरायेदार, एसी का विवरण देने में कतरा रहे हैं। 
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जनगणना 2027 से जुड़ी जरूरी बातें - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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जनगणना में लगे शिक्षकों को भले ही लोगों से सवाल पूछने का प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन हालात यह हैं कि उन्हें खुद लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। लोग शिक्षकों से पूछ रहे हैं कि जनगणना क्यों कराई जा रही है, इससे क्या होगा, कहीं संपत्ति का ब्योरा जानने के बाद सरकार टैक्स तो नहीं बढ़ाएगी, कार या अनाज की जानकारी का क्या किया जाएगा। ऐसे सवालों के बीच शिक्षकों को जनगणना का काम करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि लोग अपने घर की कार, किरायेदार, टीवी, एसी, अनाज आदि का विवरण देने में कतरा रहे हैं।

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वाराणसी में जनगणना के लिए माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 7500 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। धूप और बढ़ते तापमान के कारण शिक्षक सुबह और शाम के समय घर-घर जाकर जनगणना कर रहे हैं। शिक्षिका छवि अग्रवाल ने बताया कि लोगों के घरों पर पहुंचने पर दो तरह के लोग मिल रहे हैं। एक वे, जो बिना सवाल किए जानकारी उपलब्ध करा दे रहे हैं, जबकि दूसरे ऐसे हैं जो 33 सवालों का जवाब देने से पहले शिक्षकों से ही दोगुने सवाल पूछ रहे हैं। काफी समझाने के बाद भी कई लोग संतुष्ट नहीं हो रहे और सही जानकारी देने से बच रहे हैं।

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शिक्षिका अनुराधा पांडेय ने बताया कि लोगों में यह चिंता है कि कहीं सरकार टैक्स न बढ़ा दे। कुछ लोगों को डर है कि जानकारी देने के बाद उनका राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा। शिक्षिका मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि जिन घरों में 10 सदस्य हैं, वहां लोग केवल चार लोगों की जानकारी दे रहे हैं। पड़ोसियों से जानकारी मिलने पर दोबारा दबाव बनाकर सही विवरण भरवाना पड़ रहा है।

आमतौर पर लोग घर के बाहर खड़ी कार को दूसरे की बता रहे हैं। टीवी, फ्रिज, एसी, कूलर जैसी चीजों के बारे में बताने से इन्कार कर रहे हैं। अनाज, शौचालय और पानी जैसे सवाल पूछने पर कुछ लोग नाराज भी हो जाते हैं। शिक्षिका प्रिया गोयल ने बताया कि लोगों में जनगणना को लेकर जागरूकता की कमी है। ऐसे में क्षेत्रीय प्रधान या पार्षद की मदद लेनी पड़ रही है। जनप्रतिनिधियों के सहयोग से काम कुछ आसान हो जाता है।

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भवन किसके नाम पर, सामान या अनाज की गणना क्यों?

शिक्षकों का कहना है कि आमतौर पर लोगों को सिर्फ इतना पता है कि भवनों की गणना की जा रही है। उन्हें यह जानकारी नहीं है कि गणना करने आने वाला कर्मचारी सॉफ्टवेयर में दर्ज 33 सवाल पूछेगा। जानकारी के अभाव में लोग सवाल कर रहे हैं कि जब भवन की गणना हो रही है तो अनाज, शौचालय, टीवी और मोबाइल की जानकारी क्यों मांगी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि जनगणना को लेकर और अधिक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

बिना जानकारी के बढ़ाया जा रहा एचएलबी
शिक्षकों ने बताया कि बिना किसी कर्मचारी को जानकारी दिए उसका एचएलबी (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक) बढ़ा दिया जा रहा है। कर्मचारियों को इसकी जानकारी तब मिलती है जब उनके मोबाइल पर संदेश आता है। इससे काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
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शिक्षक नेताओं की नहीं लगी ड्यूटी, कुछ ने बाद में कटवाई
ड्यूटी कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि जनगणना ड्यूटी लगाने में पक्षपात किया गया है। उनका कहना है कि शिक्षक नेताओं को इस काम से दूर रखा गया, जबकि नियमानुसार सभी की ड्यूटी लगनी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों ने पैरवी कर अपना नाम ड्यूटी से हटवा लिया। इसका असर दूसरे कर्मचारियों के एचएलबी बढ़ने के रूप में पड़ रहा है।

अर्जित अवकाश की उठी मांग
शिक्षकों ने जनगणना ड्यूटी के बदले अर्जित अवकाश देने की मांग की है। उनका कहना है कि गर्मी की छुट्टियों में ही शिक्षकों को अपने निजी काम या परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है, लेकिन जनगणना के कारण उन्हें अवकाश नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने दिल्ली और मध्यप्रदेश की तर्ज पर यहां भी अर्जित अवकाश दिए जाने की मांग की है।
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